सरकार का वादा – एक करोड़ घरों को गरीबी से मुक्ति साल भर बाद भी महोबा के गौरहारी में नहीं कोई रोज़गार

जिला महोबा, गौरहारी में पत्थर की खनन को काम होत तो। गौरा नाम की खदान में दो सौ मजदूर काम करत ते जी से उनके परिवार को खर्च और पेट चलत तो। मई दो हजार सोलह में जा खदान में पांच मजदूरन की मौत हो गई ती। बाके बाद खदान को काम बंद हो गओ। कोनऊ काम न मिलबे के मारे लगभग दो सौ परिवार रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके। गोरा पहाड़ की खदान में जो पहली घटना नइ हती।
आदमियन को केबो हे के गांव में जा के आलावा कोनऊ रोजगार नइया। आस पास के गांव के आदमी भी जई खदान में काम करबे आत ते। कछू आदमी पत्थर निकारबे को काम करत ते कछू जई पत्थर से मूर्ति, खिलौना बनाबे को काम करत ते।
जब से ठेकेदार के द्वारा खदान में खाम शुरू भओ तब से कोऊ देखबे नइ आओ न अधिकारी न कोऊ। विभाग और प्रशासन की कमी के कारण से जा घटना घटी अगर पहले ही इतनो ध्यान दे दओ जातो और नियम के आधार से पहाड़ में खनन कराओ जातो तो इतनी घटना नइ घटती आदमियन को केबो हे के पहाड़ में फिर से काम चालू होने चाहिए। नइ तो शासन हम ओरन को रोजगार देबे।
पूर्व सचिव सुरेन्द्र नारायण की मानो तो नब्बे प्रतिशत आदमियन की रोजी रोटी पहाड़ से ही चलत ती। अब सब पलायन करबे को मजबूर हे। मूर्ति कार महेश विश्वकर्मा ने बताई के अब हम ओरन को बड़ी बड़ी मूर्ति बनाबे के लाने पत्थर नइ मिल रओ और जो नओ स्टॉक हे तो ठेकेदार बाहर सप्लाई कर रए उते उन्हें ज्यादा फायदा हे। पहाडन में काम बंद होबे से रोजगार ही नइ बल्कि शिक्षा पे भी बुरो असर परो।
विधायक अरिमर्दन सिंह की भी खनन में भूमिका हे उनसे इलाके के रोजगार के बारे में पूछने पे विधायक जी शांत हो गये।

खबर लहरिया की गौरहारी में पिछली रिपोर्टिंग के लिए देखें:

 27 मई को महोबा के गौरहारी गांव की खदान में चार मज़दूरों की मौत हो गई

महोबा के गौरहारी की हालत हुई बद से बदतर

रिपोर्टर- मीरा देवी और सुनीता प्रजापति

Published on Feb 2, 2017