सरकारी स्कूलों में पढ़ें अधिकारियों के बच्चे

(फोटो साभार: विकिपीडिया)
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इलाहाबाद। सरकारी स्कूलों में अब साहब लोगों के बच्चे भी पढ़ेंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी अधिकारियों को अपने बच्चों को प्राथमिक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को कहा है। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कोर्ट ने कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह अन्य अधिकारियों से सलाह कर यह तय करें कि सरकारी, अर्द्धसरकारी विभागों के सेवकों, स्थानीय निकायों के जन प्रतिनिधियों, न्यायपालिका एवं सरकारी खजाने से वेतन, मानदेय या धन प्राप्त करने वाले लोगों के बच्चे बोर्ड द्वारा चलने वाले स्कूलों में ही पढ़ें। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यदि कोई कान्वेंट स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजे तो उस स्कूल में दी जाने वाली फीस के बराबर धनराशि उसके द्वारा प्राप्त सरकारी खजाने में प्रतिमाह जमा कराई जाए। इसके अलावा ऐसे लोगों का प्रमोशन रोक दिया जाएगा। कोर्ट ने स्कूलों में खाली पदों और पानी समेत दूसरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न होने पर भी तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए जरुरी है।