सरकारी मशीनरी की लापरवाही के कारण हुए मुज़फ्फरनगर दंगेः रिपोर्ट

फोटो साभार - विकीपीडिया
फोटो साभार – विकीपीडिया

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में सितंबर 2013 में हुए दंगों की जांच के लिए गठित विष्णु सहाय आयोग ने दंगे के लिए अखिलेश सरकार समेत राजनीतिक दल के अन्य नेताओं को क्लीन चिट दे दी है। इन दंगों में करीब 62 लोगों की जाने गई थीं।
700 पेज की रिपोर्ट राज्य सरकार द्वारा रविवार को सदन में पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार 7 सितंबर 2013 को दंगों वाले दिन स्थानीय अभिसूचना इकाई के तत्कालीन निरीक्षक प्रबल प्रताप सिंह द्वारा मुज़फ्फरनगर के मण्डौर में आयोजित महापंचायत में शामिल होने जा रहे लोगों की संख्या की सही खुफिया रिपोर्ट नहीं दे पाने, महापंचायत की रिकॉर्डिंग ना किए जाने तथा तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चन्द्र दुबे की ढिलाई और नाकामी के कारण मुजफ्फरनगर में दंगे हुए जिनकी आग सहारनपुर, शामली, बागपत तथा मेरठ तक फैली।
दंगों के लिए दिए गए अन्य कारणों में यह कारण प्रमुख थेः
-27 अगस्त 2013 को मुस्लिम युवा शाहनवाज़ और दो हिन्दू युवाओं गौरव और सचिन की मौत से हिन्दू-मुस्लिम समाज बंट गए। जिसने पुरानी घटनाओं को फिर से भड़का दिया।
-27 अगस्त को डी.एम. सुरेंद्र सिंह और उस समय के एस.एस.पी. मंजि़ल सैनी के ट्रांसफर से हिन्दुओं में खासकर जाट समुदाय में आक्रोश बढ़ा।
-गौरव और सचिन की मौतों से जुड़े मामले में एफ.आई.आर. में दर्ज 14 लोगों की रिहाई को मुसलमानों का पक्ष लेने की कोशिश के रूप में देखा गया।
-सोशल मीडिया पर एक फर्जी वीडियो का वायरल होना। जिसमें तालिबान के अधीन इलाके में कुछ युवाओं को मारा जा रहा था। इस वीडियो को झूठे तौर पर घटना से जोड़ दिया गया।
-दोनों समुदाय के नेताओं द्वारा भड़काऊ भाषण देने पर।
-नागला मण्डौर में होने वाली पंचायत को रोक पाने में अफसरों की असफलता।
-बंसिकाला में उन हिन्दुओं पर हमला होना जो महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे।
एक्शन टेकन रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा एम.एल.ए. संगीत सोम और 229 अन्य लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो यूट्यूब पर डालने के लिए मुज़फ्फरनगर कोतवाली में मामला दर्ज है इसलिए उनके खिलाफ और कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती।
30 अगस्त को आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के लिए कदीर राना समेत अन्य पर मामला दर्ज है।