सरकारी नौकरी, मिलती कहाँ है भाई ! चित्रकूट के रैपुरा में आकर आप ऐसा नहीं बोल सकते

बात सरकारी नौकरी के चलैं तौ सबै के मुंह से या सुनें का मिलत हवै कि सरकारी नौकरी मिलत कहां हवैं सबै मड़इन का सपना होत हवै कि हमें भी सरकारी नौकरी मिल जायें पै जबै मड़ई ज्यादा अउर नौकरी कम होय तौ सबै का सरकारी नौकरी कसत मिलिहै पै चित्रकूट जिला ब्लाक कर्वी के रैपुरा गांव के बारें मा या नहीं कहि सकित आय कि सरकारी नौकरी मिलत कहां हवै काहे से या गांव के सत्तर प्रतिशत मड़ई सरकारी नौकरी करत हवै जेहिमा सामान्य जाति पन्द्रह प्रतिशत, पिछड़ी जाति पन्द्रह प्रतिशत अउर अनसूचित जाति छह प्रतिशत नौकरी करत हवैं हिंया के मड़ई बड़े शहर से लइके विदेशन मा नौकरी करत हवैं
प्रधान का लड़का आदित्य सिंह का कहब हवै कि इलाहबाद विश्वविद्यालय मा पढ़े के कारन सरकारी नौकरी जल्दी मिल जात हवै हमार गांव मा सबै जाति के मड़ई नौकरी करत हवैं
रिटायर हेडमास्टर गिरजा देवी पांडे का कहब हवै कि हिंया पटेल जाति के ज्यादा मड़ई हवै तौ उंई आपन गांव का नाम रोशन करै खातिर सरकारी नौकरी करत हवै
रिटायर हेडमास्टर लक्ष्मी सिंह बताइस कि पटेल जाति के मड़ई बाहर नौकरी करत हवै तौ बाल बच्चा लइके हुंवा रहै लागत हवै अउर गांव के विकास करै खातिर मुड़ के नहीं देखत आहीं
रिटायर हेडमास्टर कामता प्रसाद का कहब हवै कि बच्चन के पढ़ाई मा मदद करित हन मोर लड़का रीवा मा पढ़त हवै अउर बहू जूनियर हाईस्कूल मा पढ़ावत हवै
मास्टर सुनील उपाध्याय का कहब हवै कि जबै दशहरा दीपावली जइसे त्यौहार होत हवै तौ गांव अइत हवै गांव मा नींक पढ़ै वाले लड़कन का हर साल ईनाम दीन जात हवै वहै कार्यक्रम से मैं हिंया तक पहुंचे हौं
रिटायर हेडमास्टर चंद्रशेखर बताइस कि साक्षरता के कारन हमार गांव मशहूर हवै जबै दूसर जघा जइत हवै तौ मड़ई सम्मानित करत हवै

रिपोर्टर-मीरा जाटव और सहोद्रा

Published on Nov 27, 2017