समाज की बदलती कहानी ब्यूटी पार्लर में आने जाने वाले लोगों की जुबानी

जिला झाँसी। अच्छा दिखना किसे नहीं पसंद? चाहे गाँव हो या शहर, देश या परदेस। और शायद यही एक वजह है की आज ब्यूटी पार्लर जगह जगह मौजूद है। बाँदा, कर्वी, फैजाबाद और झाँसी में पार्लर से जुड़े सभी लोगों के साथ बातचीत की, चलाने वालों से,वहां काम करने वालो से और कस्टमर से भी। तब हमने जाना कीपार्लर चलाने और जाने में कौन से भाव, कैसी सोच शामिल है?
पुष्पलता श्रीवास्तव नेकई साल नॉएडा में काम करने के बाद बांदा में शुभांगी ब्यूटी पार्लर खोला। उन्होंने बताया कि जब वे बांदा में आई थी तब उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और पार्लर का उद्योग चलाके अब वे अपना घर का खर्चा चलाती हैं। “अब तो गाँव के लोग भी पार्लर जाते हैं”, उन्होंने कहा, जिससे बिजनेस अब अच्छा चलता है।झाँसी
की निर्मला गौतम,जो कुमकुम ब्यूटी पार्लर चलाती हैं, की कहानी भी कुछ पुष्पलता जैसीही है।
पार्लर चलाने के साथ, वे अब लडकियों को ट्रेनिंग भी देती हैं, जिससे की वो भी आगे बढ़ सके।हेमंत कुमारी,जो यहाँ ट्रेनिंग करती हैं, ने हमे बताया, “लड़कियां इससे अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है। आगे जाकर कोई परेशानी आये, तो उसको किसी से कुछ मांगना नहीं पड़ेगा।
”सामाजिक बदलाव की एक लहर भी गुज़रती है पार्लर में।लिंग सेजुड़े भेद भाव पर प्रश्न अपने आप उठते हैं, एक आधुनिक विचार धारा कोभी प्रोत्साहन पार्लर में मिलता है। जैसे समीर, जोकर्वी मेंराम कृपा ब्यूटी पार्लर चलाते हैं, जो खुद भी पारिवारिक और सामाजिक दबाव से लड़ चुके हैं।
“मेरी फैमिली पुलिस से है, तो मेरा इस बिजनेस में जाना उनको पसंद तो नहीं आया था, पर इसी से मैंने नाम कमाया, पैसा कमाया, तोफिर उन्होंने धीरे धीरे स्वीकार करना शुरू किया।” समीरकर्वी में एक नयी सोच की बात करतें हैं, “जो यहाँ रहते हैं वो पढ़तो बड़े शहरों में रहे हैं, जैसे लखनऊ वगेहरा, तो वहां जो रहा है वो यहाँ भी तो स्वीकृत होनी चाहिए।”उनका सपना है कर्वी में ‘यूनिसेक्स’ पार्लर खोलने का, ऐसा पार्लर जहां लड़के लड़कियां दोनों आ सके। “वरना अब तो ऐसे होता है की अगर पत्नी पार्लर में हैं, तो पति बाहर खड़ा हुआ है, इसकी क्या ज़रुरत है? अन्दर जगह है, वो भी आराम से बैठ सकते हैं।”
वहीँ बांदा के पुष्पलता का सपना है स्पा खोलने का, पार्लर से आगे एक और कदम बढ़ाना।एक बात तो साफ़ है,हर कोई अपने सपने साकार कर रहा है, पार्लर चलाने, जाने, और सीखने के ज़रिये।

रिपोर्ट- खबर लहरिया ब्यूरो

Published on Mar 8, 2017