समय भी कट गया, पैसे भी मिले और सिकहुला भी बना गया, चित्रकूट जिले के सालिकपुर में

जिला चित्रकूट, ब्लाक पहाड़ी, गांव सालिकपुर अगर हम फुर्सत होइत हन तौ टी.वी देखित हवै अउर मोबाइल मा गेम खेलित हवै। पै गांव के मेहरिया फुर्सत मा बनावत हवै सिकहौला अउर टेपार बेंच के मेहरिया आपन घर का खर्चा भी चलावत हवै। जिला चित्रकूट, ब्लाक पहाड़ी, गांव सालिकपुर अगर हम फुर्सत होइत हन तौ टी.वी देखित हवै अउर मोबाइल मा गेम खेलित हवै। पै गांव के मेहरिया फुर्सत मा बनावत हवै सिकहौला अउर टेपार बेंच के मेहरिया आपन घर का खर्चा भी चलावत हवै।  गुड़िया देवी का कहब हवै कि एक सिकहौला बनावै मा कम से कम 15 दिन का समय लागत हवै। एक सिकहौला 30 से 60 रुपिया मा बिकत हवै। टेपार लड़का वाले लइ जात हवै टेपार मा उंइ शादी का पूरा समान लइ जात हवै। 11 सौ से 5 सौ के बीच एक टेपार बिकत हवै।  ममता देवी का कहब हवै कि कांद नीचे गड़े रहत हवै।  वहिका निकाले मा बहुतै परेशानी होत हवै।  मूज लगा के सिकहौला बनाइत हवै।  सिकहौला मा आटा रोटी सब चीज रखित हवै। हम बचपन से सिकहौला बनावै सीखे हन।

रिपोर्टर- सहोद्रा

22/06/2017 को प्रकाशित