समय पर तरसई छई किसान

ऐई बोरिंग पर ध्यान न
ऐई बोरिंग पर ध्यान न

भारत देश कृषि प्रधान देश हई। इहां के लगभग सतर प्रतिशत से अधिक आदमी खेती पर ही निर्भर छथिन। खेती करे के लेल सरकार किसान के बहुत सुविधा देई छथिन। जेईमें एगो सुविधा स्टेट बोरिंग के भी हई। कारण कि खेती करे के लेल सबसे ज्यादा जरूरी पानी के होई छई।
लेकिन केतना स्टेट बोरिंग के पानी से किसान सब के सुविधा मिल पवई छई उ त किसान ही जानई छथिन। जईसे रीगा रामनगर के किसान मंगर पासवान कहलथिन कि इहां लगभग दसो साल से स्टेट बोरिंग से किसान के सुविधा न मिल पवई छई। एही तरह कहीं के बोरिंग खराब हई त कहीं नाला न हई। कहीं नाला बनलो हई त उ टूटल अउर जर-जर परल हई। कही बिजली न हई त कही ट्रांसफाॅर्मर ही न लागल हई। जेई कारण सुविधा रहईत भी किसान के लाभ न के बराबर मिल रहल हई। जेई कारण समय से खेती न हो पवई छई। जेकर नतीजा हई कि खेती के उपज कम हो रहल हई। उपज कम के कारण भुखमरी भी बढ़ रहल हई। जबकि सरकार जगह-जगह पर स्टेट बोरिंग के सुविधा देले छथिन अउर जिला से लेके गांव स्तर तक अधिकारी भी बहाली कयले छथिन। ताकि समय-समय से खेती करे के लेल पानी के सुविधा रहेअउर किसान के कोई दिक्क्त न होय। लेकिन सरकार के इ खर्चा ही कोन काम के कि पानी के लेल किसान समय पर तरसई छथिन।