सबसे बड़े ‘जल संकट’ से गुजर रहा है भारत!

भारत इतिहास में अपने ‘सबसे खराब जल संकट’ से जूझ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सवा सौ करोड़ की आबादी वाले इस देश में 60 करोड़ लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं। समय रहते हालात को सुधारने की कोशिशें नहीं हुईं तो 2030 तक यह समस्या और भयंकर रूप ले सकती है।
जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत काम कर रहे नेशनल कमीशन फॉर इंटीग्रेटेड वाटर रिसोर्स डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सन 2050 तक देश में पानी का उपयोग कई गुना बढऩे का अनुमान है, जो तकरीबन 1180 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) तक हो सकता है। जबकि वर्तमान में देश में पानी की उपलब्धता महज 695 बिलियन क्यूबिक मीटर है।
नीति आयोग की ओर से जारी समग्र जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार, जल प्रबंधन के मामले में झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब है।
जबकि गुजरात ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम किया है। इसमें बताया गया है कि गांवों में 84 प्रतिशत आबादी जलापूर्ति से वंचित है, जो पानी उपलब्ध है उसमें भी 70 प्रतिशत प्रदूषित है।
वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर है। देश में 75 प्रतिशत आबादी को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है। इसके बावजूद जल प्रबंधन को लेकर कई राज्य गंभीर नहीं है।
लेकिन खराब जल प्रबंधन के मामले में झारखंड पहले स्थान पर है। जबकि रिपोर्ट वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आंकड़ों पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, आगे यह समस्या और विकराल रूप लेने वाली है और पानी की वर्तमान आपूर्ति के मुकाबले 2030 तक आबादी को दोगुनी पानी की आपूर्ति की जरूरत होगी। जिसके चलते करोड़ों लोगों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा और इससे जीडीपी में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।