संघर्ष भरा माया देवी का जीवन

c mahela muddaजिला चित्रकूट, ब्लाक मानिकपुर, गांव मड़ैयन। हिंया 2002 से नामी डाकू खड्ग सिंह के औरत मायादेवी पंचायतीराज चुनाव के तहत प्रधान पद का चुनाव जीत गई हवै। वहिसे बातचीत करै खातिर खबर लहरिया पत्रकार बहुतै मसक्कत करै के बाद गांव पहुंची। खबर लहरिया पत्रकार उनसे बात चीत करिन।
सवाल़- हिंया कउन से सीट रहै अउर केत्ते उम्मीदवार रहै। तुम्हरे मन मा चुनाव लड़ै का विचार कसत आवा?
जवाब- ओ. बी. सी. सीट रहै। अउर उम्मीदवार उन्नीस रहैं। मोरे परिवार कहिन कि चुनाव लड़ै का हवै। चुनाव लड़ै के इच्छा मोरे मन मा भी रहै। पै परिवार वाले भी मोर हौंसला बढ़ाइन हवैं।
सवाल- का तुम पहिली दरकी चुनाव लडत हौ। या यहिसे पहिले भी चुनाव ल्ड़ चुकी हौ?
जवाब-मै यहिसे पहिले 2005 में पंचायतीराज के तहत प्रधान का चुनाव लड़ी अउर जीत गई रहौं। वहिकेे बाद 2010 मा प्रधान का चुनाव लड़ी तौ हार गई। फेर अबै हाल ही मा मैं अउर मोरे मनसवा खड्ग सिंह डी. डी. सी. का चुनाव लड़े़ पै भाग्य साथ नहीं दिहिस। मैं सोचेंव कि प्रधान का चुनाव लडिहौं़। मोरे मनसवा तैयार होइगें अउर चुनाव लड़ेंव हमार भाग्य साथ दिहिस अउर जीत हासिल भे।
सवाल- का प्रचार प्रसार खुदै कीने रहौ, केत्ता खर्च भा हवै?
जवाब– मै गांव गांव जा के खुदै प्रचार प्रसार कीने रहौं। लगभग पच्चीस हजार रुपिया खर्चा भा हवै।
जवाब- संघर्ष बहुतै ज्यादा कीने हौं। मोरे माहतारी बाप तौ खड्ग सिंह का देख केष्शादी करिन रहैं कि अच्छा इंसान हवै। अब वा बीच से डाकू बन जाये तौ यहिके खातिर का कीन जा सकत हवै। 2002 से खड्ग सिंह डाकू बन गा। वा जंगलन मा अपना जीवन व्यतीत करै लाग। मोहिका अउर मोरे बच्चन का चार चार दिन खाना नहीं मिलत रहै। रुखी सूखी खा के पेट भर लेत रहेन। मैं मनसवा का बहुतै समझायेंव पै नहीं माना। मैं बराबर समझत रहौं कि अपने बच्चन का भविष्य संवारै। का हवै। उनके मन मा या बात बइठ गे अउर दुइ साल से काफी सुधर गे हवैं। कउनौ गलत काम नहीं करत हवै। उंई कत्तौं गरीब लोगन का परेषान नहीं करिन हवै।
सवाल- 2016 से का उम्मीद हवै?
जवाब- 2016 से उम्मीद हवै कि अपने गांव का विकास करवइहौं। लोगन का कालोनी, पेंषन, पानी अउर सरकारी योजनाओं का लाभदेवइहौं। आषा हवै कि आवै वाले नये सा उम्मीद जरुर पूरी होइ।