संघर्षो से भरी है नीलू मिश्रा की सफलता की कहानी

बनारस की विधा विहार कालोनी में रहती है। देश की महिला धावक नीलू मिश्रा। नीलू देश को चौबीस गोल्ड मेडल दे चुकी हैं।नीलू की सफलता और संघर्ष से भरी कहानी है। किडनी फेल होने के और दिल की बीमारी के कारण वह छह साल विस्तर पर रहीं, लेकिन नीलू ने हार नहीं मानी और 2008 में धीरे-धीरे टहलना, फिर दौड़ना शुरू किया।

धावक नीलू मिश्रा का कहना है कि छोटी होने के कारण लोग मुझे गेम में नहीं लेना चाहते थे। 11वीं में खेल की शुरुआत की। शादी के पहले 2005 तक खेली और बारह तेरह नेशनल खेला। इन्वेस्टी में रिकार्ड बनाया। शादी के बाद 14 साल खेल से दूर रही। बाभन परिवार की बहू बनना कोई साधारण बात नहीं है वो बोले की तुम दौड़ोगी तो लोग क्या कहेंगे। तब ऐसा माहौल नहीं था। 2002 में किडनी फेल होने के और दिल की बीमारी के कारण मैं छह साल विस्तर पर रही। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। 2008 में फिर से टहलना,दौड़ना शुरू किया। तो धीरे-धीरे मेरा सपोर्ट मेरे पति करने लगे। फिर सब साथ देने लगे। 23 जुलाई 2017 में बंगलूरू के चेयरमैन क्लब में एशिया मास्टरर्स एथलेटिक्स डे पर आयोजित ब्यूटी प्रतियोगिता में ब्यूटी क्वीन का खिताब जीता। यूपी की पहली महिला जो मैंने अपना नाम पूरे देश में कमाया। यूपी से महिलाओं को नहीं खेलने दिया जाता था। में खेलने के बाद बहुत सी लडकियाँ और शादीशुदा औरते खेलने के लिए आगे आईं। जैसे कि पूनम,सुमन यादव आदि। शादी होने के बाद इनकी रोजना की प्रैक्टिस बनी रही है और नेशनल लेबल पर कई पुरुष्कारों से सम्मानित हो चुकी हूं। मुझे 2009 में वर्ल्ड का गोल्ड मेडल मिला। एशिया में लगातार मेडल मिलते रहे। इंटर नेशनल लेबल पर 53 मेडल हो गये और अवार्ड भी मिले। मैं महिलाओं को ऊपर तक लेकर चलना चाहती हूं। क्योंकि जान है तो जहान है। बिना हैंडिल के चक्की चलाना मुश्किल होता है उसी तरह से बिना महिलाओं को हैंडिल का किरदार निभाना पड़ता है।  

रिपोर्टर: अनामिका

Published on Apr 30, 2018