श्री श्री रविशंकर ने कहा, समलैंगिंक होना एक सोच है जो बदल सकती है

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आर्ट ऑफ लिविंग(जीने की कला) के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने 13 नवम्बर को दिल्ली की मशहूर जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय(जेएनयू) में बोलते हुए कहा कि समलैंगिंक (अपनी ही लिंग के व्यक्ति सेसम्बन्ध बनाने की सोच) एक मनोवृत्ति है जो बाद में बदल सकती है।
जेएनयू में एक छात्र के सवाल, क्या लिंग के आधार पर उसके साथ उसके परिवार या दोस्तों को गलत व्यवहार करना चाहिए पर श्री श्री ने कहा कि आप अपना खयाल रखे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग आपसे कैसा व्यवहार करें। आप यह कतई नहीं सोचें कि आप बीमार हैं या फिर गलत हैं, अगर अपने लिए खड़े होते हैं तो कोई भी आपका अपमान नहीं कर सकता है, लेकिन अगर आप अपने आप को कमजोर और लाचार समझेंगे, अपने बारे में गलत सोचेंगे, तो कोई भी आपको बेहतर महसूस नहीं करा सकता है।
रविशंकर ने कहा कि यह आपकी मनोवृत्ति है, इसे समझे और स्वीकार करें, आपको यह समझना होगा कि यह मनोवृत्ति हमेशा नहीं रहेगी, यह बदल सकती है। मैंने कई लोगों को देखा है जो ऐसे थे, बाद में वह सामान्य हो गए।
इससे पहले श्री श्री ने राम मंदिर मुद्दे पर तमाम पक्षकारों से मुलाकात करके इस मुद्दे का हल निकालने की बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह 16 नवंबर को अयोध्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आग्रह पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका कोई मुद्दा नहीं है, बल्कि उन्हें उम्मीद है कि इस विवाद पर कुछ हल निकल सकता है और उसी की मैं कोशिश कर रहा हूं।