शिक्षा का अधिकार, चित्रकूट के इन छात्रों के लिए लापता

शिक्षा, अधिकार, नियम के नारा प्यारा हवै, पै गांव स्तर मा यहिके गूँज कुछ धीम हवै। देखी चित्रकूट जिला,ब्लाक कर्वी के सीतापुर से या रिपोर्ट लागत हवै नियम, अधिकार अउर नारा एक कइती अउर जमीनी हकीकत दूसर कइती। चित्रकूट जिला मा सीतापुर मा केन्द्रीय विद्यालय हवै। जउन जिला मा केवल एक हवै जेहिमा केवल दस तक पढ़ाई होत हवै अउर आगे के पढ़े के खातिर बच्चा भटकत हवैं। कबहूँ हिंया से कानपुर, बनारस, अउर इलाहाबाद होय आयें हवै, पै उनकर नाम नहीं लिख गा।

अभिभावक रूध्य प्रसाद शुक्ला का कहब हवै कि अबै बच्चन मा तिमाही लड़कियन के फ़ीस अठारह सौ रुपिया अउर लड़कन के फ़ीस बाईस सौ रुपिया लागत हवै। जबै हिंया एत्ता ज्यादा लागत हवै, तौ बाहर अउर ज्यादा लागी। मैं पता किन्हें हौ तौ प्राइवेट स्कूल मा बच्चन के फ़ीस केवल डेढ़ लाख रुपिया लागत हवै।

छात्रा सूति कीर्ति बताइस हवै कि हम सबै बच्चा हिंया केन्द्रीय विद्यालय जउन बिल्डिंग रैन बसेरा मा हवै। हम सबै बच्चा वहिमा पढ़त रहे हन, पै अबै ग्यारह मा पढ़े के कउनौ सुविधा नहीं आय, तौ बच्चा बहुते परेशान हवैं।

अभिभावक प्रीति का कहब हवै कि हम मड़इ ग्रामीण क्षेत्र के आहिन, तौ बच्चा अउर कहूं नहीं शामिल होई सकत आहीं अउर फेर हमार एतनी आयौ तौ नहीं आय कि हम उनका कहूं पढ़े का भेज सकित आहीं।

अंजना श्रीवास्तव का कहब हवै कि छोट लड़की पढ़त हवै अउर बड़ा लड़का दस पास कइके निकल चुका हवै, तौ हम सब मड़इ यहै समस्या से ग्रसित हन। यहिसे हम लड़कियन के मदद करित हवै काहे से हमार नारा हवै बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओं। अगर हमार बच्चा गणित पढ़े चाहत हवै, तौ पहिले विद्यालय का प्राथमिकता दीन जइ।

विनोद कुमार प्रधानाचार्य का कहब हवै कि या मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के अधीन या केन्द्रीय विद्यालय संगठन एकाटो नामक बॉड़ी हवै। यहिका मुख्यालय नई दिल्ली मा हवै। होइने से संचालित होत हवै। या विद्यालय वाराणसी क्षेत्र के अंतर्गत आवत हवै। या केन्द्रीय विद्यालय जिला चित्रकूट मा 2011 मा शुरू भा हवै। पहिले या शिवरामपुर मा चलत रहै। होइनौ यहै समस्या रहै कि कमरा कम रहै अउर बच्चा बरसात मा सुरक्षित नहीं रहे आहीं। सुरक्षा के खातिर सीतापुर रैन बसेरा मा बिल्डिंग मिली हवै। हिंया जबै 11,12 के क्लास होइहै तौ हिंया पहिले तीन पुस्तकालय बनवाई जईहें। भौतिक विज्ञान,रसायन,विज्ञान,अउर जीव विज्ञान खोलै का पड़ी। कमरा मिल जाय तौ 11, 12 के क्लास शुरू होई सकत हवैं। मोहिका आदरणीय डी.आई.एस.ओ साहब से एक प्रस्ताव मिला हवै कि जीजीआईसी मा कुछ कमरा खाली हवै। जेहिमा हम 11, 12 के क्लास शुरू कइ सकित हन। मैं हायर अथार्टी भेज दीने हौं। काहे से या निर्णय प्राचार्य खुदै से नहीं लइ सकत आहीं। अब या हायर अथार्टी बताई कि हुंवा एक कमेटी बनगे हवै। एक दूसर विद्यालय के प्राचार्य को डीप्यूट कीन गा हवै। उनकर विजीक्ट जीजीआईसी मा होई चुका हवै।

अभिभावक विजेंद्र कुमार बताइस कि अबै तक पता चलत रहै कि क्लास कर्वी मा लगिहैं, पै अब पता चला हवै कि प्रधानाचार्य हिंया से गलत रिपोर्ट भेज दिहिस हवै।

रिपोर्टर: नाजनी रिजवी

Published on Apr 25, 2018