शादी को मिली एक नई परिभाषा

Desh Videsh - Same sex marriageअमेरिका। लम्बी कानूनी और सामाजिक लड़ाई के बाद, अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने 26 जून को समलैंगिक शादियों को कानूनी दर्जा देना का फैसला सुनाया। अब अमेरिका के पचास राज्य सरकारों पर ये निर्णय छोड़ दिया है कि वे इस कानून को अपने राज्यों में लागू करना चाहते हैं या नहीं। तेरह राज्यों ने इस कानून को अपनाया है और सैंतीस राज्यों ने इसे अभी तक स्वीकार नहीं किया है।
समलैंगिक का मतलब है कि आदमी और औरत के बीच ही नहीं बल्कि औरत औरत के बीच और आदमी आदमी के बीच रिश्ता। समलैंगिक जोड़ी में रहने वाले लोगों को शादी के अधिकार के लिए नारीवादी और समलैंगिक लोग 1970 के दशक से लड़ रहे हैं। अमरीकी सरकार के नियमों के अनुसार एक हज़ार तीन सौ अधिकार उन्हीं लोगों को मिलते हैं जो कानूनी रूप से शादी शुदा होते हैं जैसे पेंशन, नौकरी से छुट्टी, स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आदि।
पिछले दस सालों में समलैंगिक शादी के लिए काफी आन्दोलन हुए हैं जिस से अमेरिका की ही नहीं बल्कि दुनिया भर की जनता प्रभावित हुई है। ये कानून इस ही बात को मजबूती देता है कि हमारे समाज में अनेक प्रकार के लोग हैं, जिनकी इच्छाएं और रहने के तरीके अनेक हैं। उन्हें कानून अनदेखा नहीं कर सकता है।
लेकिन दूसरी तरफ शादी भी एक विवादित विषय है। रितुपर्ना बोहरा भारतीय नारीवाद और समलैंगिक आन्दोलन से दस साल से जुड़ी हंै। उनका कहना है कि अगर आदमी और औरत शादी कर सकते हैं तो समलैंगिक शादी में क्या ऐतराज़ है? पर यह भी है कि शादी को कानूनी दर्जा देकर लोगों के अस्तित्व को बांधा जा रहा है। शादी के नियम तय करते हैं कि किसको क्या अधिकार है, एक दूसरे पर और सरकारी सुविधाओं पर। क्या शादी हमारा आखरी उद्देश्य है? क्या हमने सोचा है, उन लोगांे का क्या होगा जो शादी नहीं करना चाहते हैं, या जो शादी के बाहर रहना चाहते हैं? क्या उन्हें अधिकार नहीं मिलने चाहिए ?