‘शबरी संकल्प योजना फेल’ क्योंकि बांदा जिले में हैं कई कुपोषित बच्चे

एक कइती सरकार कुपोषण से बचावै के खातिर कइयौतान के मिशन चलावत है, जेहिसे बच्चा कुपोषित ना होय सकै। आंगनबाड़ी कार्यकर्तन का कइयौतान के नियम बताये जात हैं, ताकि वुई गांव के बच्चन के देखभाल कई सकै। होइने दूसर कइती दीख जाय, तौ बांदा जिला अस्पताल का 11 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चन से भरा है। उनकर हिंया इलाज चलत है। देखित है कि कबै तक ठीक होई पावत हैं। कुपोषण से बचाव के खातिर ‘‘शबरी संकल्प योजना’’ शुरू कीन गे है। जेहिके तहत निशुल्क उपचार के साथैपोषण पुनर्वास केंद्र मा बच्चन का 14 दिन तक भर्ती करावा जात है। कुपोषण से बचाव के खातिर का काम होत है?  पूजा का कहब है कि लड़की पल्टी करत रही है, तौ जाँच के दौरान डाक्टर बताइस कि लड़की का कुपोषण हुआ है। गीता बताइस है कि बच्चा दुबला पतला होत जात है। आंगनबाड़ी के द्वारा पता चला हाई कि बांदा मा कुपोषण का इलाज होत है। 14 दिन के खातिर बच्चा का भर्ती करै का पड़ी, पै बच्चा ठीक होई जई। आरती का कहब है कि हिंया जाँच के खातिर एक दरकी आये रहे हन, तौ डाक्टर बताइस कि बच्चा कुपोषित है हिंया भर्ती करा देव। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव पिपरहरी के कृष्णा का कहब है कि पोषाहार जैइसे डबल दई देइत है अउर तौ हिंया कउनौ सुविधा नहीं आय।

सीएमओ बांदा के संतोष कुमार का कहब है कि या सीजन मा इनतान का समय चलत है, कि बुखार डायरिया जइसे बीमारी फ़ेइलत हैं। जेहिके कारन बच्चा कुपोषण का शिकार होई जात हैं, पै हिंया सब सुविधा दीन जात हैं। कुपोषण के बचाव के कोशिश जोर-शोर से होत है, पै वहिका असर देखात नहीं आय।   

रिपोर्टर: गीता

Published on Jun 1, 2018