वैलेंटाइन डे: इज़्ज़त, सभ्यता, जाति, सेक्स की मार देखिये बाँदा और चित्रकूट के विचार

कहते हैं प्यार करने वाले कभी डरते नहीं, लेकिन खुलकर प्यार करना क्या आज आसान है? नया नियम और नई बंदिशे भी लगी है प्यार पर। किस बात का डर है समाज के ठेकेदारों को? वैसे क्या आप जानते है हमारे देश में लोग प्यार करते ही नहीं है, सिर्फ विदेशों में लोग इश्क-मुहब्बत करते हैं।
बांदा की हिन्दू युवा वाहिनी की अध्यक्ष सीमा गिरी का कहना है कि प्यार करना तो फालतू के चोचले है। इसका कोई उद्देश्य नहीं है। प्यार करने से अच्छा है कि बच्चें पढ़ाई में ध्यान दें। डाक्टर रामप्रकाश का कहना है कि वेलेंटाइन डे पश्चात सभ्यता के रूप में मनाया जाता है। हमारे सिद्धांत के अनुसार यह बिल्कुल नाजायज है। पुरानी विचारधारा के लोग इसे पसंद नहीं करते है, नये लड़कें- लड़कियां अपनी परम्परा को भूलकर वेलेंटाइन डे मनातें हैं। वही गीतांजली इसके बारें में कहती है कि यह विदेशी काम है, पर आज के बच्चें इस काम को कर रहे हैं, जो सही नहीं है। राजेश्वरी का कहना है कि प्यार का विरोध नहीं करना चाहिये लेकिन गांव के लोग इसे बेइज्जती समझते है, इसलिए लोग लडकियों को पढ़ने नहीं भेजतें हैं।
चित्रकूट के गायत्री परिवार के श्रवण कुमार का कहना है कि हमारा वेलेंटाइन दे रोज होता है। अपने माता-पिता को प्रेम से पूजा करें तो अच्छी बात है।वेलेंटाइन डे के दिन दोस्त बनाना अच्छी बात नहीं है। भाजपा विधायक आर के पटेल क्व प्रतिनिधी शक्ति प्रताप सिंह तोमर का कहना है कि किसी को भी समाजिक मर्यादा का उल्लघंन नहीं करना चाहिये शिक्षा का आभाव है क्योंकि शिक्षित लोग ऐसा नहीं करते हैं। किसी के साथ वेलेंटाइन डे मनाओ तो जीवन भर उसका साथ दें। हमारे देश की सन्स्कृति सबसे अच्छी है। युवा वर्ग वेलेंटाइन डे मनाके अच्छा नहीं करते हैं।

रिपोर्टर- खबर लहरिया ब्यूरों

Published on Feb 13, 2018