वायु प्रदूषण छीन रहा ज़िन्दगी जीने का हक

(फोटो साभार - विकिमीडिया)
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नई दिल्ली। दो साल से कम उम्र के तीन बच्चों ने 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डाली है। यह देखने में भले ही अजीबो गरीब और चैकाने वाला लगे। मगर पहली बार इस तरह की याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई है। याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली सरकार पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस जारी न करे।
दिल्ली के छह-छह महीने के अर्जुन गोपाल, आर्णव भंडारी और चैदह महीने के ज़ोया राव भसीन के मां-बाप ने इन बच्चों की इस याचिका को डाला है। याचिका में कहा गया है कि पटाखों के कारण हवा में ज़हर घुलता है। यह ज़हर सबसे ज़्यादा छोटे बच्चों पर असर करता है। इससे फेफड़े में कैंसर, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और सांस संबंधी कई और बीमारियां हो जाती हैं। इसमें कहा गया है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। यह भी कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन दिल्ली का वायु प्रदूषण कम करने में नाकामयाब साबित हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना चाहिए। हालांकि सभी धर्मों के लोगों को अपना त्यौहार अपने ढंग से मनाने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 25 में दिया गया है। मगर ज़िन्दगी जीने का अधिकार इससे भी बड़ा है। ऐसे में पटाखे फोड़ना किसी खास समुदाय की भावना से जुड़ा मुद्दा होने से ज़्यादा ज़िन्दगी जीने के हक को छीनने का मुद्दा है।

ग्लोबल बर्डन आॅफ डिज़ीज़ नाम की गैर सरकारी संस्था की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले तेरह सालों में वायु प्रदूषण की वजह से मरने वालों की संख्या छह गुना बढ़ी है। इस दौरान छह लाख से ज़्यादा लोग अपनी जान वायु प्रदूषण के कारण गंवा चुके हैं।

पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था सेंटर फाॅर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में हर घंटे एक मौत वायु प्रदूषण के कारण हो रही है। दरअसल वायु प्रदूषण का कारण 2.5 माइक्रोमीटर व्यास वाला धुआं है। इसमें ऐसे ज़हरीले पदार्थ होते हैं जिनसे कई तरह की सांस संबंधित बीमारियां पैदा हो रही हैं। पर्यावरण की जानी-मानी पत्रिका नेचर के अनुसार हर साल दुनिया में तैंतिस लाख लोग वायु प्रदूषण से मर रहे हैं। इसमें सबसे ज़्यादा वायु प्रदूषण वाले देश चीन, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश बताए गए हैं।