लोकसभा के काम-काज में 92 घंटे के अवरोध में लगे 144 करोड़ रुपए

मध्य प्रदेश से बीजू जनता दल के सांसद जय पांडा ने घोषणा की है कि लोकसभा के मौजूदा सत्र के दौरान व्यर्थ हुए 92 घंटे की क्षतिपूर्ति के लिए वह अपने नवंबर और दिसंबर का वेतन छोड़ देंगे। हालांकि, उन्होंने यह उल्लेख नहीं किया कि यह राशि कितनी होगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014 के बाद से हुए 10 सत्रों में से मौजूदा सत्र सबसे ज्यादा बाधित हुआ और इस सत्र में सबसे कम काम हुआ है।

लोकसभा की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2015-मार्च 2016) के दौरान 545 लोकसभा सांसदों को भारत देश के समस्त करदाताओं ने वेतन और अन्य भत्तों में करीब 177 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। इसमें जून 2015 से आंकड़े उपलब्ध हैं, इसमें यात्रा और दैनिक भत्ता शामिल नहीं हैं। इसमें कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उन्हें संबंधित मंत्रालयों द्वारा भुगतान किया जाता है।

इसका अर्थ है कि लोकसभा सत्र में भाग लेने वाले दिनों में भत्ते सहित प्रत्येक लोकसभा सांसद पर करीब दो लाख सत्तर हज़ार रुपए का मासिक खर्च होता है। जब संसद सत्र चल रहा होता है, तब सांसदों को प्रतिदिन 2,000 रुपए का दैनिक भत्ता भी मिलता है।

हालांकि इस पूरे मामले में अन्य भत्ते जैसे कि मुफ्त आवास, चिकित्सा देखभाल और दूरसंचार सुविधाएं शामिल नहीं हैं। सत्र के दौरान संसद चलाने में सरकारी खजाने से प्रत्येक मिनट दो लाख पचास हज़ार रुपए का खर्च लगता है।

इंडियास्पेंड की गणना के अनुसार, वेतन, भत्तों और संसद को चलाने की लागत के आधार पर, मौजूदा लोकसभा के 10 वें सत्र के दौरान संसद में कार्य बाधित होने के कारण 144 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसमें मकान पर 138 करोड़ रुपए एवं वेतन के रुप में 6 करोड़ रुपए और अन्य भत्ते भी शामिल हैं।

लोकसभा पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हर महीने सांसदों को वेतन के रूप में पचास हज़ार रुपए, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता के रूप में पैतालीस हज़ार रुपए, कार्यालय खर्च के रूप में पंद्रह हज़ार रुपए और सचिवीय सहायता के लिए तीस हज़ार रुपए मिलते हैं। इस तरह, कुल मिला कर उन्हें प्रति महीने लगभग एक लाख चालीस हज़ार रुपए मिलते हैं।

सांसदों को 34  उड़ान दौरे और सरकारी कामों के लिए सीमित रेल और सड़क यात्रा के लिए भी पुनर्भुगतान किया जाता है, जैसा कि द हिंदूने मार्च 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

इंडियन एक्सप्रेस ने 25 दिसंबर, 2015 की रिपोर्ट में बताया, सरकार ने सांसद के मासिक वेतन में वृद्धि का प्रस्ताव किया है जो पचास हज़ार रुपए से बढ़ा कर एक लाख रुपए, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता पैतालीस हज़ार रुपए से बढ़ा कर नब्बे हज़ार रुपए और सचिवीय सहायता और कार्यालय भत्ता पैतालीस हज़ार रुपए से बढ़ा कर नब्बे हज़ार रुपए तक करने का प्रस्ताव किया है।

यदि इस प्रस्ताव को वित्त मंत्री अरुण जेटली की मंजूरी मिल जाती है तो सांसदों का वेतन और भत्ता लगभग दोगुना हो जाएगा और मौजूदा राशि प्रति माह एक लाख चालीस हज़ार रुपए से बढ़ कर प्रति माह दो लाख अस्सी हज़ार रुपए हो जाएगी।

फोटो और लेख साभार: इंडियास्पेंड