ले लो… फिर ना कहना हमें नहीं मिली

manorjan copyबुन्देलखंड। कभी-कभी रास्ते पर चलते समय हमें ऐसे लोग मिल जाते हैं जिनका कोई जवाब नहीं। ऐसे ही कुछ लोगों में मनोहर भी शामिल हैं। अगर आप झांसी और महोबा में ट्रेन से सफर कर रहे हैं तो आपकी मुलाकात मनोहर से हो सकती है।
मनोहर का कोई जवाब नहीं है। वह दोनों आंखो से अंधे हैं पर उनका जज़्बा किसी भी दूसरे इंसान से कम नहीं है। इतना तो कोई अच्छा भला इंसान भी नहीं कर पाता है जितना मनोहर कर लेते हैं। झांसी और महोबा तक ट्रेन में मूंगफली और गुटका बेचते हैं। साथ ही बांसुरी बजा कर लोगों को संगीत का मज़ा भी देते हैं और सभी लोगों से चिल्ला-चिल्ला कर कहते हैं, ‘‘मूंगफली और गुटका के साथ संगीत फ्री है जितना भी लेना है ले लीजिए। बाद में मत कहना कि हमें नहीं मिला।’’
मनोहर ने बताया कि वह बचपन से दोनो आंखो से नहीं देख पाते हैं, ‘‘मैं पांच साल से मूंगफली, गुटका बेचता हूं। पहले लोग बहुत कम खरीदते थे इसलिए मैंने सामान के साथ-साथ संगीत भी सुनाना शुरु कर दिया है। बांसुरी बजा कर हर तरह के गानों की धुन निकालता हूं। संगीत की वजह से मेरी काफी बिकरी हो जाती है। अब तो लोग बांसुरी की धुन सुन कर मुझे अपनी ओर बुलाना शुरु कर देते हैं।’’