लाठी लेकर हमले के लिए तैयार पराजित उम्मीदवार

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घायल कल्लु
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घायल विरेन्द्र

जि़ला लखनऊ, ब्लाॅक काकोरी, गांव सैथा। यहां 13 दिसंबर से गांव में डर का माहौल बना हुआ है। चुनाव हो चुके हैं और प्रधान भी घोषित हो चुका है। लेकिन क्यों सैथा गांव में दहशत है? इसका कारण हैं राजेंद्र लोधी।
यहां के कुछ लोगो का आरोप है कि चुनाव न जीत पाने पर उम्मीदवार राजेंद्र लोधी ने गांव के लोगों को पीटा है। लोगों ने उनके खिलाफ थाने में मारपीट का मामला दर्ज कराया है जिसे वापस लेने के लिए भी दवाब बनाया जा रहा है। राजेन्द्र लोधी के पिता पिछले बीस  सालों  से प्रधान थे। उन्हांेने अच्छा काम किया था। उनके मरने के बाद 2005 में राजेन्द्र लोधी भी जीते। लेकिन जनता की मदद करने की जगह वे लोगों पर धौंस जमाते। किसी से भी मारपीट करने लगते थे। कई सारे आपराधिक मामले भी इनके खिलाफ दर्ज हैं। जैसे मारपीट, धोखाधरी। तीन बार तो वे लोगों पर गोली चला चुके हैं। इनकी दबंगई से लोग परेषान हो चुके हैं। लेकिन कोई इनके विरोध में बोल नहीं सकता। पिछले चुनाव में महेष विष्वकर्मा खड़े हुए और चार वोट से जीते। तब भी इन्होंने गांव में हंगामा किया।
इस बार महेष की पत्नी रानी विष्वकर्मा चैतीस वोटों से जीती हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद लोगों में दहषत थी। प्रधान को छोड़ने पुलिस आई थी। उनके समर्थक भी दूसरे रास्ते से आए क्योंकि उस रास्ते पर राजेन्द्र लोधी लाठी लेकर बैठे थे।
पीड़त विरेन्द्र कुमार ने बताया कि ‘षाम चार बजे जब मैं अपनी आटा चक्की पर जा रहा था। राजेन्द्र अपने दरवाजे़ पर थे। मुझे देखते हीे तीन चार लोग ले आए और मुझे मारने लगे।’
कल्लु ने बताया कि ‘पिछले डेढ़ साल से राजेंद्र ने बाहर के एक आदमी को रखा हुआ है जिसका नाम दद्दू है। वह गांव में और दहशत फैला रहा है। मतदान तो अपने मत का दान होता है जनता को जो पसंद आएगा उसे ही चुनेगी। लेकिन फिर भी उन्हें  जो भी वोट मिले हैं डर के कारण ही मिले हैं। पुलिस भी उन्हें  कुछ नहीं कर रही। सब उनसे डरते हैं।’