ललितपुर जिले के नारहट गाँव में नहीं मिलता काम

जिला ललितपुर, गांव नारहट इते के आदमियन को नई मिल रई मजूरी अपनो परिवार पालबे के लाने लकड़िया बेंच बेंच के कर रए गुजारो। जीमे उने दो समय कि रोटी तक नई मिल रई पेट भर के।
फूला ने बताई हम लकड़िया को धंधो करत दिन रात जई मजूरी कर रये। अब खेत जमीन है नईया काय से मोड़ी मोड़ा पाले।
मीरा ने बताई के लकड़िया काटबे के लाने हम चनाउनी मजोरा तक जात। भोत दूर दूर तक जात जीसे हम सबेरे आठ बजे निकर जात फिर ढूढ़त फिर काट के लेयात सो पांच बजे तक लौटत फिर बेंच के गांव में फिर चून लेयात फिर बनात मोड़ी मोड़न को खुआत। गठ्ठा धरे फिरत अगर कोऊ लेत नईया तो घरे भगयात काये के अब कम बिकती हे। जंगल में सो घुसन नई देत कत के जओ तुम इते से नईया इते लकडिया भूखी मरो चाहे प्यासी मरो अब कछू मजूरी है नईया अब हम पे बनत हे नईया गठ्ठा गिरो छाती पे सो जा लग गई आदमी है सो बीमार डरो हर्दी चूना लगा लओ। काय में से इलाज कराये। अब कछु मजूरी मिलत नईया सो जोई लकड़िया को काटत रत।
चन्द्री ने बताई के वो तो भोगने है सो भोग रए। काय के खेती पाती हे नईया सो अब का करे जोई करत जई से अपनों परिवार पाल रए प्रधान कछू सुनत नईया। मजूरी कछु देत नईया गरीब आदमियन को। बड़े बड़े आदमियन को और यादव को देत काम अगर हमे मिलतो तो हम काय को जो करते। अब लेओ अगर नई बिक रई लकड़िया तो बई दिना नई बनत खबत जब कछु हे नईया तो का करे। जेसो जो कछु हे बई में गुजरो करने का करे।
रिपोर्टर- राजकुमारी
31/08/2016 को प्रकाशित

ललितपुर जिले के नारहट गाँव में नहीं मिलता काम
यहाँ के सहरिया आदवासी जंगल से लकड़ी काट के करते हैं गुज़ारा