ललितपुर जिले का बूढी गांव, जिसे आज तक नहीं मिली कोई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

ललितपुर जिला महरौनी गांव बूढ़ी| इस गांव में न आंगनबाडी केंद्र है न यहां कोई आंगनबाडी है|इससे यहां कि गर्भवती महिलाओं को पन्द्रह किलोमीटर दूर टीकाकरण के लिए जाना पड़ता है|छोटे बच्चों कि पढ़ाई कि व्यवस्था भी नहीं हो पाती है इसके लिए गांव के लोगों ने आंगनबाडी कि मांग कि है|सुपरवाइजर राममूर्ति कुशवाहा का कहना है कि बूढ़ी गांव कि आबादी सात सौ है यहां मिनी आंगनबाडी केंद्र खुल सकता है जब इस गांव के आंगनबाडी कि जगह निकाली जाएगी तभी आंगनबाडी की भर्ती होगी|
रघुवीर सिंह का कहना है कि शुरू से ही हमारे गांव में आंगनबाडी नहीं हैं पहले जनसंख्या कम थी अब ज्यादा हो गई है|परन्तु अभी भी आंगनबाडी केंद्र नहीं खोला गया है|
छोटी राजा और धानी राजा का कहना है कि आंगनबाडी केंद्र होने से गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक खाना नहीं मिल पाता हैं|नवजात शिशु और गर्भवती महिलाओ को टीकाकरण के लिए पन्द्रह किलोमीटर दूर जाना पड़ता है|बेबी राजा ने बताया कि 2015 में आंडगनबाडी की मांग कि थी|आंगनबाडी न होने से गर्भवती महिला,किशोरी और बच्चों को कई तरह कि समस्या होती है|

बाईलाइन-राजकुमारी

12/09/2017 को प्रकाशित