लखनऊ मेट्रो का शुभारम्भ के साथ हुआ अखिलेश और योगी में सियासी युद्ध

फोटो: ट्विटर/योगी आदित्यनाथ

मेट्रो को लेकर लखनऊ के लोगों का इंतजार 5 सितम्बर को खत्म हो गया। लखनऊ में चलने वाली मेट्रो ट्रेन भारत की पहली ऐसी मेट्रो होगी, जिसको चलाने का जिम्मा देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के कंधों पर है।
लेकिन सीएम योगी आदित्नाथ द्वारा लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन से पहले इसका श्रेय लेने के लिए अखिलेश यादव ने सियासी लड़ाई छिड़ गयी थी।
बता दें कि अखिलेश यादव ने इस प्रोजेक्ट को भले ही जमीन पर उतारने का काम किया हो, लेकिन लखनऊ मेट्रो का सपना मायावती ने देखा था। 2007 से 2012 के बीच जब वह सूबे की मुख्यमंत्री थीं तो 2011 में उन्होंने पहल करते हुए दो बार लखनऊ मेट्रो की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार को भेजी थी। इस प्रोजेक्ट को उस समय मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
लेकिन इस ख्वाब को जमीन पर उतारने का काम अखिलेश राज में हुआ था। अखिलेश यादव के दौर में लखनऊ मेट्रो को मंजूरी मिली। ये अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल हो गया था। यही वजह थी कि इस सपने को पूरा करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। लखनऊ मेट्रो परियोजना की शुरुआत 2013 में अखिलेश यादव सरकार ने की थी और 2017 में ये पूरी हो गई। विधानसभा चुनाव से पहले लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार भी नहीं हुआ था कि अखिलेश यादव ने महज दो मेट्रो स्टेशन के बीच मेट्रो का उद्घाटन कर दिया।
योगी के उद्घाटन करने से पहले अखिलेश ने अपने दौर में किए गए उद्धाटन का फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसके बाद योगी और अखिलेश में लखनऊ मेट्रो का श्रेय लेने का सियासी लड़ाई छिड़ गई। एसपी कार्यकर्ताओं ने पूरे शहर में पोस्टर से जरिए ये बताना चाहा कि लखनऊ मेट्रो अखिलेश यादव की देन है।
वहीं केंद्र सरकार इसका क्रेडिट खुद लेना चाहती है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने ट्वीट में लखनऊ मेट्रो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना करार दिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को इस कार्य को पूरा करने के लिए बधाई दी थी। इस पर उनकी काफी आलोचना हुई। लोगों ने कहा कि अखिलेश द्वारा किए गए काम का क्रेडिट सरकार खुद लेना चाहती है। योगी आदित्यनाथ भी लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन के बाद से सोशळ मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं।
योगी आदित्य नाथ को ट्रोल करते हुए लिखा जा रहा है कि आपका तो बस यही काम रह गया है कि राम नाम जपना पराया माल अपना। इसी तरह से मेट्रो के उद्घाटन के लिए अखिलेश यादव की तारीफ कर के भी योगी आदित्य नाथ और बीजेपी पर लोग निशाना साधते रहे।
वहीँ, लखनऊ मेट्रो दौड़ में कितना आगे जाएगी, इसकी पोल पहले दिन की रेस में ही खुल गई। चारबाग से ट्रांसपोर्टनगर के लिए जा रही लखनऊ मेट्रो दुर्गापुरी और मैवाया स्टेशन के बीच तकनीकी खराबी की वजह से 25 मिनट से ज्यादा रुकी रही।
फिर थोड़ा और आगे बढ़ी तो आलमबाग स्टेशन पर इमरजेंसी ब्रेक लगने के कारण रुक गई। यहां भी ट्रेन करीब 45 मिनट रुकी रही। ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे। एक घंटे से भी ज्यादा समय से फंसे परेशान और बेहाल यात्रियों को इमरजेंसी दरवाजे से बाहर निकाला गया। खराब हुई मेट्रो को दूसरी मेट्रो से खिंचवाकर वर्कशॉप के लिए रवाना किया गया।