लइकिन के खेलकूद में मिलत बढ़ावा

जिला वाराणसी, ब्लाक काशी विद्यापीठ, गांव टड़िया।इहां के मैदान कउनों खेल के मैदान नाहीं हव आउर नाहीं कउनों स्टेडियम हव। इ गांव के एक ठे खेत हव जवने में लइकिन खेललिन। इहां हमेशालगभगआठ दस लइकिन खेले खातिर दस दस किलोमीटर दूरसेसाइकिल से  आवलिन।

इहां खेल सीखे आवे वाली कक्षा छः में पढ़े वाली वर्षा भाला फेकलिन। आउर वर्षा जिला स्तर पे भी खेल चुकल हइन। जवने में एनकर दूसरका स्थान रहल। एनके इ हौसला आउर जीत के देख के स्कूल से वर्षा के फीस माफ कर दीहल गइल। इहां कई अउरों लइकिन जइसे तारा भारती, आरूषि, आउर अंजना भी जैवलिन खेल सीखलिन। आउर इ सब लइकिन के कहब हव कि हमनी बहुत दूर दूर के गांव से इहां आइला। हमनी के भी देश प्रदेश स्तर पे खेले के सपना हव। हमनी खूब मेहनत से खेलब आउर आगे बढ़ब। इ लइकिन के खेल सिखावे वाले लाल चन्द्र राम बतइलन कि इ सब लइकिन खूब मेहनत से सीखलिन। आउर आज कई लोग देश प्रदेश स्तर भी खेलत हइन। एन सब के भी हौसला देख के लगला कि इ लोग भी खेल में खूब आगे बढ़ियन। हम इहां मुफ्त में खेल सिखाइला। एमें कोई के कउनों सहयोग नाहीं हव। मैदान के पूरा खर्चा हमहीं देइला।

ऽ जैवलिन थ्रो मेंएक ठे 2.5 मीटर के भाला फेकाला।

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ऽ हैमर थ्रो में एक ठे हथौड़ी फेकल जाला जवने में लइकिन के हथौड़ा 4 किलो आउर अदमिन के हथौड़ा 7 किलो के होला।

ऽ डिस्कस थ्रो में एक ठे 2 किलो के चक्का फेकाला। तीनों खेल सौ साल से भी ज्यादा पूराना हव। इ सब खेल के ओलम्पिक्स जइसन अन्तर्राष्ट्रीय खेल में भी मान्यता मिलल हव। इ खेल में जेकर भाला या हथौड़ा सबसे दूर जाई उहे जीतला।