रेशम कीट किसानों की अनदेखी

ज़िला  सीतापुर, गांव महौली। यहां के लगभग साठ प्रतिशत लोग रेशम उत्पादन में लगे हैं। लेकिन इन्हें न उचित सुविधा मिल रहीं है न उचित दाम। इसकी शिकायत उन्होंने कितनी ही बार संबंधित अधिकारियों से की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

कीड़ा पालने वाले किसान शिवपाल ने बताया, ‘हमें सेंटर से कीड़े मिलते हैं। एक साल में चार फसल होती है। एक कीड़ा अट्ठाइस दिन तक जि़्ान्दा रहता है, जो पंद्रह सौ मीटर धागा बनाता है। किसानों के लिए बोरिंग और खाद दी जाती है। किसानों को कीट पालन का समय समय पर प्रशिक्षण भी दिए जाने का नियम है। मगर यहां न हमें प्रशिक्षण मिला और न हीं कोई सरकारी मदद।’

शिवरानी ने बताया, ‘हमें आवास की भी पहली किस्त देकर लटका दिया। आवास के लिए सरकार से मिलने वाली तय रकम बावन हज़ार  है। पहली किश्त पच्चीस हज़ार की मिलनी थी। इसमें से हमें केवल सात हज़ार  ही मिले। बाकी मांगो तो कहते हैं पहले जो मिला है उसका काम दिखाओ। अब सात हज़ार  में हम घर कहां से बनाना शुरू करें?’
रेशम उत्पाद सेंटर में काम करने वाली ज़बरुन्निसा ने बताया कि उन्होंने 2013-14 में पौधों की देखभाल का काम किया था। तब से उनकी  मजदूरी  बाकी थी। दो बार धरना प्रदर्शन के बाद ही पैसा मिल पाया।

रेशम उत्पाद सेंटर के चैकीदार तेजपाल यहां 1993 से काम कर रहे हैं। ‘मेरा इकत्तीस महीने से वेतन रुका पड़ा है। घर में खाने तक के लाले पड़ चुके हैं। इस साल बच्चों का स्कूल में नामांकन तक नहीं करा पाए। कहते हैं कि मिल जाएगा। ज़्यादा बोलने पर गाली देकर भगा दिया जाता है,’ उन्होंने बताया।

आदर्श रेशम उत्पादक वेलफेयर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजकिशोर ने बताया कि 1860 से ही यहां के लोग रेशम उत्पाद में लगे हुए हैं। सरकार की योजना तो अच्छी है लेकिन इसे सही से चलाया नहीं जा रहा। रेशम की कीमत ढाई सौ से तीन सौ रुपए किलो है लेकिन किसानों से इसे सौ से डेढ़ सौ रुपए किलो में खरीदा जाता है। इसकी शिकायत मार्च से लेकर जुलाई तक दस बार कर चुके हैं। उन्होंने एसोशिएसन के मौजूदा प्रमुख रणवीर सिंह पर लूट मचाने का आरोप लगाते हुए बताया, ‘हमने 17 अगस्त को राजधानी लखनऊ में धरना दिया ताकी इस भ्रष्ट अधिकारी को निलंबित कर पूरे घोटाले की सी.बी.आई. जांच कराई जाए।’