रिपोर्ट दर्ज कराने और इंसाफ में क्यों देरी

29-01-15 Kshetriya Banda - Kailashpati INtercollege for webजिला बांदा, ब्लाक बबेरू, गांव बेर्राव। यहां स्थित कैलाशपति इंटर कालेज के अगल बगल देशी और अंग्रेजी शराब के ठेके चलते हैं।
इंटर कालेज 1972 से चल रहा है। लगभग दस सालों से कालेज के अगल बगल देशी और अंग्रेजी शराब के ठेके चलते हैं। दारू पीने वाले आए दिन कालेज में घुस कर उपद्रव करते हैं। कालेज के प्रधानाचार्य ने कई बार डी.एम., एस.पी. और आबकारी विभाग को दरखास दी।
कैलाशपति इण्टर कालेज के अध्यक्ष श्रवण कुमार का कहना है कि हमारे कालेज को 1972 में हाईस्कूल व 1990 में इण्टर की सरकारी मान्यता मिली है। इसके पहले से भी छात्र छात्राएं पढ़ते हैं। छात्राओं की संख्या पचास प्रतिशत है। कालेज के आसपास दारू पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। हमें हमेशा कोई दुर्घटना होने का डर बना रहता है। हमने डी.एम., एस.पी. से इसकी शिकायत की तो बोर्ड हटा लिए गए लेकिन दुकानें उसी जगह पर हैं। कई छात्र छात्राओं ने बताया कि आते जाते लोग दारू के नशे में अश्लील हरकतें व बातचीत करते हंै। कालेज आने और कालेज से जाने में बहुत डर लगता है। बेर्राव गांव के लोगों ने भी कहा कि यह ठेका कालेज से दूर होना चाहिए। हमारे लड़के और लड़कियों को हमेशा कोई दुर्घटना होने का डर बना रहता है।

आबकारी विभाग के अधिकारी अजय कुमार का कहना है कि नियम है कि स्कूल, कालेज, धार्मिक जगह और सिनेमा घर से चार सौ मीटर के अन्दर शराब के ठेके नहीं होने चाहिए। मुझे पता है कि इन जगहों के आस पास बहुत जगहांे पर ठेके हंै। इसके लिए आबकारी विभाग को दरखास दें। इसकी एक प्रति डी.एम. और एक प्रति आबकारी विभाग लखनऊ में भेजें।