राष्ट्रीय साक्षरता मिशन जमीनी हकीकत

जिला महोबा,ब्लाक कबरई,गांव किडासीनिरक्षरों को साक्षर करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरुआत की थी।यह योजना शुरू तो हुई परन्तु इस योजना के कितने लोग साक्षर हो पायें हैं।इसकी सच्चाई कागजों  में कुछ और हकीकत में कुछ और है।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि 2015 में नौ हजार दो सौ सत्तर लोग और 2016 में दस हजार नौ सौ अड़तालिस लोग बस इस योजना में शामिल थे।
सकुन कहती है कि हमको पढ़ने का मौका मिलता तो आगे बढ़ जाते लेकिन हमारे परिवार वालों ने हमें काम सिखाया है पढ़ना नही सिखाया है।कौशल्या ने बताया कि साक्षरता स्कूल में दो दिन पढ़ने के लिए गये है हमें कुछ पढ़ना नहीं आता है किसानी करना आता है।राष्ट्रीय साक्षरता मिशनके तहत पढ़ाने वाले प्रेरक हरिबाबू मधु और रंजीत का कहना है कि एक बार लोग पढ़ने के लिए आये हैं।लेकिन उनके पास लिखने का कुछ सामान नहीं था।पढ़ाने के लिए एक कमरा होना चाहिए जिसमें रजिस्टर और  पढ़ने का सामान रखा जा सके क्यों कि दो हमारे पाने वालें प्रेरक क्या-क्या व्यवस्था करेगें।जिला समन्वय अमोद  कुमार का कहना है 2011 से अभी तक प्रेरकों का बीस-बीस महीने से वेतन नहीं मिला है।दो साल से हमारा बजट नहीं आया है।
बाईलाइन-सुनीता प्रजापति

08/09/2017 को प्रकाशित