राष्ट्रगान कहां बजे और कहां नहीं? बहस फिर गरम

download - Copyनई दिल्ली। राष्ट्रगान के वक्त कौन खड़ा हुआ कौन नहीं? यह हमेशा विवाद का मुद्दा बना रहता है। ज़्यादातर लोग राष्ट्रगान के वक्त खड़े होने और खड़े न होने को देशभक्ति और देशद्रोह से जोड़कर देखते हैं।
हाल ही में मुंबई के एक सिनेमा हाॅल में राष्ट्रगान के दौरान न खड़े होने वाले एक परिवार के साथ गाली-गलौच हुई। परिवार के एक लड़के के साथ मारपीट की गई। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस घटना के वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह से अपनी सीटों पर बैठकर कुछ लोग चार-पांच लोगों पर चिल्ला रहे हैं।
एक व्यक्ति उठता है और कहता है कि मेरा पैर खराब है। मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो सकता हूं। फिर भी खड़ा हुआ। हालांकि इस वीडियो को अब यूट्यूब से हटा लिया गया है।

*कानून क्या कहता है?
राष्ट्रगान के आदर की बात है। अगर आप वर्दी में हैं तो सलामी देंगे, अगर आप वर्दी में नहीं हैं तो सावधान खड़े हो जाएंगे और साथ में गाएंगे। समस्या कई बार इसलिए होती है कि जगह और माहौल का चुनाव ठीक नहीं। जहां हम इसकी मर्यादा को कायम रख सकते हैं वहीं बजाना चाहिए।

*कानून इस मसले पर क्या कहता है? इसे समझने के लिए नीचे दी जा रही मशहूर वकील और राज्यसभा में मनोनीत सांसद के.टी.एस. तुलसी से की गई बात।
अगर हम गलत माहौल में राष्ट्रगान को चला देंगे तो ऐसी मुश्किलें सामने आएंगी। राष्ट्रगान को सिनेमा में बजाने की ज़रूरत नहीं है।
आप वहां मनोरंजन के लिए जाते हैं। अभी हमारे देश में युद्ध नहीं चल रहा है। कोई ऐसी आपात स्थिति नहीं है कि आप राष्ट्रगान को सिनेमा में बजाना शुरू करें।
राष्ट्रगान को ऐसी जगह पर बजाना चाहिए जहां आप उसका सम्मान कर सकें। अनुशासन रख सकें। अगर आप क्रिकेट स्टेडियम में राष्ट्रगान बजा देंगे तो दिक्कत आ सकती है।