रणजी ट्रॉफी को फिर से घरेलू मैदानों से दूर खेलने की योजना बना रहे हैं गांगुली

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली तकनीकि समिति ने 1 अगस्त को रणजी ट्रॉफी के लीग दौर में होमअवे(घरेलू मैदान से दूर) प्रारूप को फिर से शुरू करने का फैसला किया है।
बीसीसीआई ने पिछले साल रणजी ट्रॉफी 2016-17 सत्र में तटस्थ स्थलों(घरेलू मैदानों ) पर आयोजित करने का फैसला किया था। कई टीमों ने बीसीसीआई से शिकायत की थी कि घरेलू टीमें अपने हिसाब के पिचें बनाती हैं, इस पर बीसीसीआई ने तटस्थ स्थलों पर मैच कराने का फैसला किया था।
घरेलू टीम के कई कप्तानों ने इसी साल की शुरुआत में मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में तटस्थ स्थलों पर मैच कराने के प्रारूप पर अपनी निराशा जताई थी। गांगुली ने कहा, “हमने स्थानीय कारकों की वजह से होमअवे प्रारूप को दोबारा लागू करने का फैसला किया है। खिलाड़ी और कप्तान भी यही चाहते थे।
बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने कहा, पिछले साल छत्तीसगढ़ के आने से रणजी ट्रॉफी में कुल टीमों की संख्या 28 हो गई है। इसलिए रणजी ट्रॉफी के तीन ग्रुप में 9,9,10 टीमें होती हैं। अब 28 टीमों को चार ग्रुप में बांटा जाएगा। ग्रुप की शीर्ष दो टीमें क्वालीफायर राउंड में जाएंगी।
रणजी ट्रॉफी में अब ,बी,सी और डी नाम के चार ग्रुप होंगे जिनमें सातसात टीमें होंगी। हर ग्रुप से शीर्ष दो टीमें क्वालीफायर में जगह बनाएंगी। उन्होंने कहा, “दिलीप ट्रॉफी गुलाबी गेंद से ही खेली जाएगी और उसके अधिकतर मैच दिनरात प्रारूप में होंगे।
गांगुली ने कहा, “रणजी ट्रॉफी का आगामी सत्र पुराने प्रारूप के तहत छह अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। टीमें भी यही चाहती थीं और हम भी यही चाहते थे।