रक्तदान को तकनीकी की मदद से जरुरतमंद तक पहुंचाते किरण वर्मा

साभार: फेसबुक/सिम्पली ब्लड

देश में होने वाली मौतों में एक बड़ा कारण दुर्घटना के कारण खून की जरूरत का पूरा न हो पाना है, और इस समस्या को दूर करने के लिए किरन वर्मा ने एक ऐप बनाया है, ‘सिम्पली ब्लड’। इसे बनाने के पीछे की कहानी ये हैं कि उन्होंने सात साल की उम्र में अपनी मां को कैंसर के कारण खो दिया था। उन्होंने उस समय मन बना लिया कि वे लोगों की जान बचाएंगे और वे रक्तदान करने लगे। पर वे रक्तदान शिविरों में रक्त नहीं देते थे, क्योंकि ये लोग निशुल्क रक्त को बाहर पैसों में बचने का काम करते हैं। इस कारण ही किरण सरकरी अस्पतालों में रक्तदान करते थे। पर एक दिन उन्हें एक फोन आया कि किसी को खून की जरुरत है। जब उन्होंने रक्त दे दिया, तो वह रक्त देने वाले व्यक्ति की पत्नी से मिले, उन्हें तब पता चला कि उस महिला ने उनके रक्त को 1500 रुपये में खरीदा था।
इस घटना के बाद उन्हें समझ आया कि जरुरतमंद तक निशुल्क रक्त देना कितना मुश्किल है। उसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर अपना सारा समय इस काम को ही दे दिया।‘सिंपली ब्लड’ एक बहुत सरल तरीके से हजारों रक्त देने वाले को जोड़ता है और जरुरत होने पर रक्त देने वाले को सूचना जाती है कि रक्त की जरुरत है। रक्त देने वाले निर्धारित जगह, तारीख और समय के हिसाब से रक्तदान कर देते हैं। ‘सिंपली ब्लड’ ऐप की शुरुआत के दिन ही उन्हें एक रिक्वेस्ट आ गई थी और ऐप के शुरुआत के पहले साल में ही 100 जीवन बचाने की कोशिश को उन्होंने 6 महीने में ही प्राप्त कर लिया। आज इस ऐप का मकसद 2020 तक 10 लाख लोगों का जीवन बचाना है।