योजनाओं से किसानों को क्या मिला?

Photo0783नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी इस बार मनरेगा और खाद्य सुरक्षा योजना को आधार बनाकर अपनी चुनाव प्रचार में जुटी है। लेकिन हाल ही में दिल्ली में स्थित में सेंटर फॉर स्टडीज डेवलपिंग सोसायटी द्वारा भारतीय किसानों की स्थिति की पड़ताल के लिए किए गए सर्वे में जो बातें निकल कर आईं, वह इन योजनाओं की पोल खोलती दिखाई देती हैं। सर्वे अट्ठारह राज्यों के एक सौ सैंतिस जिलों के पांच हजार किसानों के बीच किया गया।
अगर सर्वे के आंकड़ों को देखें तो छियत्तर प्रतिशत किसान खेती को छोडकर दूसरा काम करना चाहते हैं। जबकि साठ प्रतिशत किसान चाहते हैं कि उनके बच्चे शहरों में बस जाएं। चैवालिस प्रतिशत किसानों को ही तीन वक्त का खाना मिल पाता है। जबकि ग्रामीण इलाकों में ज्यादा शारीरिक मेहनत और घर के खाने पर ही निर्भर होने के कारण तीन वक्त का खाना खाया जाता है। छत्तीस प्रतिशत किसान कच्चे घरों या झोपड़ियों में रह रहे हैं। केवल पचासी प्रतिशत किसानों ने मनरेगा के बारे में सुना है। जबकि केवल इक्यावन प्रतिशत किसानों को ही इसका लाभ मिला है। मनरेगा में घोटाले की जांच भी चल रही है। ज़मीनी हकीकत देखें तो मनरेगा के बावजूद लोग ईंट के भट्ठे और पहाड़ों को तोड़ने के जोखिम भरे काम में लगे हैं। छियासठ प्रतिशत महिलाएं किसानी करती हैं। किसान परिवारों की सड़सठ प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि खेती से गुजारे लायक आमदनी नहीं होती है।