ये पेट की भूख है साहब, कुछ काम तो करना होगा, अम्बेडकरनगर जिले के पांच साल की अंजली की कहानी

जिला अम्बेडकरनगर, ब्लाक भीटी, गांव महमदपुर रस्सी पै खेल देखाउब केतना जान जोखिम मा डारै वाला खेल बाय। संभला न रहै तौ कबहूँ भी कुछ होय सकाथै। एसेन ही खेल देखावाथिन भीटी ब्लाक के महमदपुर धामा पट्टी गांव कै पांच साल कै अंजली। जवन रस्सी पै चलिके आपन जान जोखिम मा डारिके खेल देखावाथिन।जिला अम्बेडकरनगर, ब्लाक भीटी, गांव महमदपुर रस्सी पै खेल देखाउब केतना जान जोखिम मा डारै वाला खेल बाय। संभला न रहै तौ कबहूँ भी कुछ होय सकाथै। एसेन ही खेल देखावाथिन भीटी ब्लाक के महमदपुर धामा पट्टी गांव कै पांच साल कै अंजली। जवन रस्सी पै चलिके आपन जान जोखिम मा डारिके खेल देखावाथिन। अंजलि महावत कै कहब बाय कि जब हम छोट के रहेंन तबै से हमरे घर वाले हमका रस्सी पै चलै, दउरै सिखावत रहिन। अउर अब हम सीख के गांव, शहर, कस्बा,  मोहल्ला मा खेल देखायके पेट भरै के ताई दुई समय कै रोटी कै कमाई करीथी।  अंजली कै कहब बाय की इहै काम हमार पूर्वज भी करत रहे। आज हमरे सब करत हई।हम अपने परिवार के साथ खेल देखावै जाईथी। जगह जगह जहां ज्यादा कमाई होय सकै वहि खेल देखाईथी। यहि खेल मा कउनौ जादूगरी नाय हुवत केवल सावधानी बरतै का पराथै। अगर हमार ध्यान जरा भी इधर उधर होय जाये तौ हम अपने ज़िन्दगी से हाथ धो बैठेंगे। अंजली कै कहब बाय कि हमरे पास न तो कउनौ घर बाय न खेती बाड़ी कि हमार गुजर बसर होय सकै। अउर न सरकार से कउनौ सुबिधा मिली बाय। सिर्फ कहै बस के ताई गरीबन केताई सारी योजना बनाई जाथै। पर मिलत नाय कुछ भी।  अंजली कै शौक पढ़ाई कै बाय जेसे वै खेल देखाय के आपन पढ़ाई कै खर्च भी निकारा थिन जेसे आपन पढाई आगे बढ़ाय सकै।

रिपोर्टर- संगीता

Published on Aug 4, 2017