ये निबौरी क्या चीज़ है? झांसी जिले के खैलौर गांव में आज कल चल रहा है इसका व्यापार

सावन का मौसम बड़ा ही सुहाना होता है। इस मौसम में ज्यादातर सभी पेड़ों पर फल आ चुके होते हैं और पक कर गिरने लगते हैं। नीम भी उन्ही पेड़ों में से एक है जो सावन के महीनें में अपना फल यानी निबोरियां गिराने लगता है। शुरुआत में हरी और कड़वी निबोरियां सावन तक पक कर पीली हो जाती हैं। इस पूरे महीनें निबोरियां गांवों में यहाँ वहां बिखरी देखी जा सकती हैं।
वहीं, इन दिनों झाँसी जिले के खैलौर गाँव में निबोरियों को बीन कर उन्हें बेचने का काम किया जा रहा है। गाँव के कुछ परिवार जमीन पर बिखरी पड़ी निबोरियों को एकत्र करने में लगे हैं। यह निबोरियां मुख्य रूप से नीम का तेल बनाने के काम आती हैं। इसके आलावा इनसे दवाईयां, खाद, कीटनाशक और आयुर्वेदिक तेल आदि भी बनाये जाते हैं।
गाँव की निवासी कस्तूरी और उनके बच्चे आजकल निबोरियां बटोरने में लगे हैं। वह बताती हैं कि यह निबोरियां बीन कर उनकी थोड़ी कमाई हो जाती है। इन नोबोरियों को बेचने के लिए गाँव के बाहर मंडी तक जाना पड़ता है और वहां उसके खरीददार 5 से 7 रूपये किलो में निबोरियां खरीदते हैं।
झाँसी की मंडी में बैठे रोहित कुमार गुप्ता निबोरियों के खरीददार हैं जो गाँववालो से 20-25 बोरे भर कर नोबोरियां खरीद कर ले जाते हैं।

रिपोर्टर- सफीना 

Published on Jul 11, 2017