यू.पी. की हलचल – हवाई घोषणाएं और वादे, जमीनी विकास नहीं

khabar_lahariya_logo_12 (1)खबर लहरिया न्यूज़ नेटवर्क महिला पत्रकारों का एक समूह है । खबर लहरिया की पत्रकार का आंखों देखा हाल।

जिला फैजाबाद के अमानीगंज ब्लाक के गांव तिंदौली के लोग 28 सितंबर 2014 को बेहद उत्साहित थे। यहां के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद लल्लू सिंह ने इस गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था। लोगों को लगा कि जब सीधे सांसद का हाथ इस गांव पर होगा तो गांव के विकास को भला कौन रोक पाएगा! गोद लेने के बाद घोषणाओं और वादों की पोटली लिए तीन बार लल्लू सिहं यहां आए भी। मगर एक साल गुजरने के बाद भी गांव के हालात जस के तस हैं।
गांव में रहने वाले विनोद सिंह और मोहम्मद हुसैन का कहना है कि जब से तिंदौली को गोद लिया है तब से केवल यहां सर्वे ही हुआ है। अधिकारी और नेता यहां आते हैं, मीटिंग करते हैं और चले जाते हैं। पहले तो कुछ विकास के लिए पैसा आता भी था, लेकिन जब से गोद लिया है तब से तो बिल्कुल काम ठप पड़ा है। इससे अच्छा तो गोद नहीं लेते। जयकला से विकास के बारे में सवाल पूछने पर वह झल्लाकर बोलती हैं कि गोद लेने के बाद न कोई काम हुआ है और न सासंद साहब काम करने के मूड में हैं। बिजली, पानी, सड़क, राशन कार्ड, हर तरह की समस्या इस गांव में हैं। मगर लगता है कि उनका हल सांसद के पास भी नहीं।
जयकला और भोला ने बताया कि मनरेगा का काम तो मिला हमें, मगर पैसा अब तक नहीं मिला। गांव की दलित बस्ती में कई लोग ऐसे मिले जिनके जाब कार्ड में 2011 के बाद हाजिरी ही नहीं चढ़ी थी। 2014 के बाद से किसी को कोई काम नहीं मिला है। दो या तीन घंटे से ज्यादा बिजली रहती नहीं। प्राथमिक स्कूल की स्थिति पर प्रधानाध्यापक जोखू प्रसाद ने बताया कि एक सौ इक्कीस बच्चों पर मैं अकेला हूं, दो शिक्षामित्र हंै, लेकिन इस समय नहीं आ रहे। उनकी गैरमौजूदगी में प्रेरक नियुक्त किए गए हैं। प्रेरक दरअसल प्रौढ़ शिक्षा केंद्रों में प्रौढ़ों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किए जाते हैं। मगर प्रौढ़ शिक्षा केंद्र न चलने के कारण इन्हें स्कूल में नियुक्त कर दिया गया है। प्रौढ़ों को पढ़ाने और बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग- अलग क्षमताओं की जरूरत होती है। ऐसे में प्रेरक पढ़ाई कराने में कितने सक्षम होंगे, यह भी सोचने वाली बात है। हेडमास्टर की चुनाव के अलावा कई और सरकारी कार्यक्रमों में ड्यूटी लगती ही रहती है। तो ऐसे वक्त में तो स्कूल राम भरोसे ही चलता है।
तिंदौली के भाजपा कार्यकर्ता कुंवर बहादुर मिश्रा का कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से तीन करोड़ रुपया सांसद निधी के तहत आया है। अभी हैंडपंप लगवाए गए हैं। सर्वे के आंकड़ों का आकलन कर बाकी काम भी करवाए जाएंगे। भाजपा जिलाध्यक्ष राम कृष्ण तिवारी से जब विकास के बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि सर्वे हो गया है, सांसद निधि के पैसों से कुछ काम हुआ है, हमने बजट बनाकर भेजा है लेकिन राज्य सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला है। हालांकि तिवारी जी ने जोर देकर कहा कि सर्वे हो चुका है, बजट बन चुका है, वहां क्या काम कराना है उसकी रूपरेखा बनाई जा चुकी है। मगर हैरानी की बात यह थी कि वह बार बार वहां स्कूल न होने की बात कह रहे थे, आंगनबाड़ी न होने की बात कह रहे थे, जबकि गांव में यह दोनों ही हैं। इस बीच तिवारी जी ने विकास न होने के पीछे राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कई बार कहा कि हमने विकास के लिए राज्य सरकार को अपना प्रस्ताव भेज दिया है। हम उन्हें बार बार याद भी कराते हैं। मगर राज्य सरकार की तरफ से हमें कोई कोई मदद नहीं मिलती। उनकी बातों से तो यही लग रहा था कि गांव गोद लेकर वाह वाही लूटेंगे सांसद और विकास न होने पर जिम्मेदार ठहराई जाएगी राज्य सरकार।
तिंदौली के लोगों ने कहा कि जब से गोद लिया है तब से ही क्या प्रधानी के चुनाव चल रहे हैं? एक साल से ज्यादा हो गया, एक पैसे का काम यहां नहीं हुआ है, चार दिन की आचार संहिता और केंद्र सरकार का राज्य सरकार पर आरोप लगाना तो काम न करने का तो बहाना भर है। उधर कुंवर बहादुर ने लोगों की शिकायत का जवाब देते हुए कहा कि काम की रूपरेखा बन गई है, बस काम शुरू ही होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार है इसलिए काम करने में दिक्कत होती है। मगर इस बहाने का जवाब भी लोगों के पास था। हालांकि इस वक्त बहादुर मिश्रा खुद भी चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। उनकी पत्नी इस बार प्रधानी के चुनाव में खड़ी हैं। मिश्रा जी विकास के लंबे चैड़े दावे कर वोट हथियाने की कोशिश में लगे हैं।
एक साल पहले हुए विकास के वादों से उत्साहित लोग आज पूरी तरह से हताश हैं। नाराजगी और हताशा के बीच कुछ लोगों ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि भाजपा सांसद को हमने जिला पंचायत के चुनाव में जवाब दे दिया है। यहां से इस बार एक निर्दलीय उम्मीदवार की भारी मतों से जीत हुई है। अगर यही हाल रहा तो पांच साल भी बीत जाएंगे, सांसद साहब की सत्ता जाते देर नहीं लगेगी।
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों को आदेश दिया कि वह एक एक गांव गोद लेकर उसका विकास करें। उसे आदर्श गांव बनाएं। सांसदों ने मजबूरन गांव तो गोद ले लिए मगर विकास इन गांवों तक नहीं पहुंचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब एक गांव आदर्श गांव बनेगा तो आसपास भी विकास के छींटे पड़ेंगे। मगर यह क्या? यहां तो गोद लिया गांव ही विकास के छींटे के लिए तरस रहा है। आदेश के बाद प्रधानमंत्री ने भी इन गांवों की तरफ पलटकर नहीं देखा। न ही अपने सांसदों से इन गांवों का कोई रिपोर्ट कार्ड ही मांगा।