यू.पी. की हलचल – यहां भी पैसा ताकत और पुरुषों का बोलबाल

खबर लहरिया न्यूज़ नेटवर्क महिला पत्रकारों का एक समूह है। महोबा में खबर लहरिया की पत्रकार का आंखों देखा हाल। इस पत्रकार ने पहली बार चुनावों को इतने करीब से देखा।

भले ही संविधान के अनुसार चुनाव लोकतंत्र का हथियार हैं मगर मौजूदा समय में आम जनता को मिले इस हथियार के मायने बिल्कुल बदल गए हैं। चुनाव हथियार है सत्ता पाने का। चुनाव जीतने का जरिया है ताकत और पैसा। इन सबके अलावा एक बात और भले ही महिला सीट पक्की करके सरकार औरतों को राजनीति की मुख्यधारा में लाने का दावा कर रही हो मगर सच्चाई यह है कि यह औरतें पुरुषों के लिए मोहरा भर हैं। कई औरतों ने नामांकन के समय भी घूंघट नहीं खोला। प्रचार के लिए बने पोस्टर में पतियों और ससुर के नाम और फोटो लगे थे।
महोबा में इन दिनों जिला पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन हुए। इसमें ताकत और पैसा साफ दिख रहा है। ब्लाक कबरई के गांव ड्योढ़ी में सिद्धगोपाल शाहू की बहू का नामंकन इस पद के लिए हुआ है। सिद्धगोपाल समाजवादी पार्टी के नेता रह चुके हैं। जब आरती नामांकन के लिए कार्यालय पहुंची तो उसके पीछे चालीस गाडि़यां और करीब सौ लोगों की भीड़ थी। चुनाव के लिए नामंकन आरती का हुआ था मगर नारे उसके पति साकेत के नाम के लगाए जा रहे थे। प्रचार के लिए बने पोस्टर में भी साकेत का ही नाम और फोटो थी। आरती को तो यह भी पता नहीं कि वह कौन से वार्ड से खड़ी होने वाली हैं। उसने बताया कि उसका पति ही खड़ा होने वाला था मगर महिला सीट होने के कारण उसे खड़ा कर दिया। आरती के नामंकन के समय जब इतना पैसा और ताकत नजर आ रही है तो सोचने वाली बात है कि चुनाव के वक्त क्या होगा। सोचना यह भी चाहिए कि इतना पैसा खर्च करने के सत्ता में आने वाला व्यक्ति जनता की भलाई करेगा या फिर पहले अपनी जेब भरेगा।
ब्लाक कबरई के सिजहरी गांव में तो एक पति पत्नी ही एक दूसरे के सामने खड़े हैं। पत्नी को सपा का समर्थन है तो पति को भाजपा का। यानी एक ही घर में दो पार्टियों का समर्थन। महिला उम्मीदवार ने तो साफ कहा कि यही सोचकर हम दोनों अपना नामांकन करा रहे हैं कि एक की सीट तो पक्की हो ही जाएगी। अगर दोनों की हो गई तो मैं अपना नाम वापस ले लूंगी। उनसे पूछा गया कि आप समाजवादी पार्टी की समर्थक हैं इसीलिए आपको उनका समर्थन मिल रहा है। तो उन्होंने बताया कि मेरे पति को भाजपा का समर्थन मिला है। दोनों ही पार्टियों की इस इलाके में पकड़ है। इसलिए हम दोनों ने अलग अलग इन पार्टियों का समर्थन लिया। कुल मिलाकर दूसरे चुनावों की तरह तरह यहां पर भी पैसा ताकत और पुरुषों का वर्चस्व ही दिख रहा है।