यू.पी. की हलचल – मोदी की कथनी और करनी में अंतर

लखनऊ की वरिष्ठ पत्रकार सारा जमाल कई अखबारों के लिए लिख चुकी हैं।

इस हफ्ते दो ऐसी घटनाएं घटीं ज¨ सरकार के रवैए को जताने वाली हैं।
पहली घटना 16 अप्रैल को घटी, जिसमंे आगरा में एक बानवे साल पुराने रोमन कैथोलिक चर्च पर हमला हुआ। इसमें मदर मैरी और जीजस के बचपन की एक मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया। मदर मैरी की मूर्ति के चारों ओर लपेटी गई कुत्ते को बांधने वाली चेन से हमलावरों की घिननी मानसिकता का पता चलता है।
दूसरी घटना 21 अप्रैल की है। इसमें अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में चढ़ाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा भेजी गई चादर है। ख्वाजा मोइनुद्दीन एक सूफी संत थे जिनका जन्म अफगानिस्तान में हुआ था लेकिन इन्होंने जि़्ादगी भारत में गुज़्ाारी। इन्होंने यहीं मरना कुबूल किया। ऐसा करके उन्होंने पूरी दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। इनकी दरगाह में दुनियाभर से अलग- अलग धर्मों के लोग दुआ मांगने आते हैं।
यह दोनों घटनाएं एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। एक में ऐसे सूफी की दरगाह पर चादर चढ़ाई गई जिसने सभी धर्मों के लोगोें को प्रेम का संदेश दिया। दूसरी में सभी धर्मों को मानने वाले देश भारत के अंदर अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थल पर हमला हुआ। दुखद यह है कि चर्च पर हुए हमले के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ नहीं किया। आगरा के चर्च पर हुआ हमला ताज़्ाा मामला है। लेकिन ईसाइयों और चर्च पर लगातार हमले हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने फरवरी में अल्पसंख्यकों की हिफाज़्ात का भरोसा दिया था। इसके दो कारण थे – दिल्ली चुनाव में भाजपा को मिली भारी असफलता और ओबामा द्वारा भारत को पढ़ाया गया धर्मनिरपेक्षता का पाठ। मोदी ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निंदा की थी पर फिर उसके बाद भी पश्चिम बंगाल में ईसाई नन के साथ बलात्कार हुआ। एक बार फिर मोदी ने कुछ नहीं कहा। आजकल जब इंटरनेट पर चुटकियों में संवाद हो जाता है, ऐसे युग में और भारत जैसे देश जहां धर्मनिरपेक्षता ही उसकी पहचान है, वहां नरेंद्र मोदी का ऐसी घटनाओं पर तुरंत कुछ न कहना सवाल खड़े करता है।