यू.पी. की हलचल – प्रचार के दौरान सुबह से शाम तक उम्मीदवार के साथ

जि़ला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए खड़ी उम्मीदवार के साथ एक दिन प्रचार के दौरान साथ रहने का खबर लहरिया की पत्रकार का अनुभव।

पूर्व जि़ला पंचायत अध्यक्ष और इस बार दोबारा उम्मीदवार अंशू शिवहरे का इंटरव्यु मुझे लेना था। यह कबरई ब्लाॅक के खन्ना कस्बे के वार्ड नंबर एक से उम्मीदवार हैं। मैंने उनके घर में फोन लगाया। लेकिन फोन नहीं लगा। हम उनके घर पहुंचे। पता चला कि वे तो प्रचार के लिए गई हैं। बस यहीं से शुरू हो गई मेरी भागदौड़।
उनके घर से पता चला कि वे कबरई ब्लाॅक के परसहा गांव में हैं। मैंने कहा, ‘ठीक है मैं वहीं पहुंचती हूं।’ घर पर बैठे लोगों ने कहा, ‘उनका प्रचार कार्यक्रम तो हर दस मिनट में बदलता है।’ हमने कबरई पहुंचकर फोन लगाया तो पता चला कि वे मटौंध पहुंच गई हैं। हमने फिर फोन किया तो वहां से जवाब मिला कि आप कल मिलिएगा। मगर हमें तो आज ही मिलना था। हमने पूछा कि आप इस वक्त कहां है? तो बताया कि पचपहरा गांव में हैं। हमने कहा, ‘मैं वहीं आती हूं।’ उन्होंने कहा, ‘ठीक है! यहीं बैठक भी है आप आ जाइए।’ आखिरकार कई किलोमीटर का कच्चा रास्ता पैदल तय करके हम उनसे मिलने जा पहुंचे। हम उनकी गाड़ी पर बैठे। रास्ते में कुछ पोस्टर दिखाते हुए बोलीं, ‘देखिए पूर्व विधायक की बहू के पोस्टर मेरे ऊपर चिपका दिए गए हैं। क्या यह ठीक है?’ वाकई पोस्टर के ऊपर पोस्टर चिपकाने का प्रचलन जैसे राज्य के बड़े चुनावों में होता है वैसे ही यहां भी दिखा। अंशू लोगों से हाथ जोड़कर वोट मांग रही थीं। रास्ता ऊबड़-खाबड़ था। शाम का समय था। खरका गांव में तो रास्ता गड्ढों में धंसा था। लेकिन शिवहरे के गार्ड और सरकारी खिदमतगार उन्हें मोबाइल की रोशनी दिखा-दिखाकर सुरक्षा घेरे में लेकर आगे बढ़ा रहे थे। उनके साथ उनके पुरुष सहयोगी और बंदूकधारी गार्ड, एक महिला सरकारी कर्मचारी भी थी। लोग बिजली न पहुंचने और सड़क न बनने की शिकायत लगातार कर रहे थे। अंशू ने भी सहानुभूति बटोरने के लिहाज़ से कहा, ‘मैं क्या करूं प्रशासन साथ नहीं देता। बिजली के लिए मैंने विभाग को लिखा। मगर मेरी सुनी नहीं गई। सड़क बनवाना चाहती हूं। मगर पिछले कुछ महीनों से मैं अपने पति को बचाने में लगी थी। उन्हें झूठे आरोप में फंसा दिया गया। दरअसल पति इंजीनियर हैं और मध्यप्रदेश में सामने आए व्यापम घोटाले में फंसे हैं।’ अब लोगों ने सहानुभूति भरी नज़रों से देखते हुए वोट देने का भरोसा तो दे दिया मगर अंशू ने गाड़ी पर बैठते ही कहा कि कौन-कौन वोट देगा यह तो बाद में ही पता चलता है।