यू.पी. की हलचल – पंचायती चुनाव में धन-बल की धमक

सुमन गुप्ता
सुमन गुप्ता

सुमन गुप्ता उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे फैज़ाबाद स्थित जन मोर्चा अखबार में काम करती हैं। इस समय वे यू.पी. स्तर पर पत्रकार हैं।

प्रदेश में पंचायत चुनाव अब अंतिम दौर में हैं। तीन दौर की वोट पड़ चुके हैं। 1 नवंबर को चुनाव के परिणाम भी आ जाएंगे। लेकिन पंचायत चुनाव की प्रक्रिया दिसंबर में ही पूरी हो पाएगी जब सभी पंचायत पदों के चुनाव पूरे हो सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार छिटपुट घटनाओं को छोड़कर सब कुछ सामान्य रहा है। इस चुनाव में सरकार के कई मंत्रियों के बेटा-बेटी और पत्नियां अपने भाग्य आज़मा रही हैं। वहीं प्रदेश में सभी विपक्षी दल कांग्रेस, भाजपा, रालोद ने पंचायत चुनाव पर सरकारी दबंगई का आरोप लगाया है।
चुनाव के दूसरे चरण में पैकपेड के अध्यक्ष सहित पंद्रह सरकारी कर्मियों के खिलाफ चुनाव में अनियमितता बरतने का मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस प्रशासन के पास इस घटना की जानकारी नहीं थी। इस सूचना के मिलते ही राज्य निर्वाचन आयोग सक्रिय हुआ और उसने सरकारी मशीनरी के पेंच कसे। कांग्रेस ने पंचायत चुनाव में गड़बडि़यों की शिकायत कर पूरा चुनाव रद्द कर केन्द्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में चुनाव कराने की मांग की है।
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के तहत जि़ला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनाव में बडे़ पैमाने पर धनबल दिखाई दिया। पंचायतों के आरक्षण के लिए भी धन का प्रभाव दिखा। जि़ला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सियों पर बैठने के लिए धन-बल का प्रभाव सदस्यों के निर्वाचन में ही दिख रहा है। सत्ता के दल ने अपना कोई अधिकृत प्रत्याशी नहीं दिया है जो ज़्यादा प्रभाव व वर्चस्व वाला है। वह अपने आगे दूसरे को टिकने नहीं देने चाहता, यही कारण है कि कई स्थानों पर अपने प्रतिद्वंदियां को जान से ही मार देने की घटनाएं हुईं जिससे वे चुनाव में खडे़ ही न हो सकें। ग्राम प्रधान के चुनाव को लेकर भी जंग जारी है। प्रधान चुनाव के लिए नवम्बर के प्रथम सप्ताह में अधिसूचना जारी होने वाली है। इसकी तैयारियों के लिए गांव-गली में अभी से वोटरों को आकर्षित करने के सारे तरीके अपनाए जा रहे हैं। वोटर भी मौका देखकर अपने काम करवाने का वादा उम्मीदवारों से ले रहे हैं।