यू.पी. की हलचल – डांट का ड्रामा, पर्दे के पीछे पुचकार

आँचल लखनऊ के जाने-माने अखबार में बतौर पत्रकार काम करती है। पिछले सात आठ सालों से वे पत्रकारिता कर रही हैं।

‘छोटे लोहिया’ यानी जनेश्वर मिश्र के जयंती समारोह में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों को फटकार रहे थे तो माहौल वैसे ही रस्मी लग रहा था जैसे रंगमंच पर कोई नाटक चल रहा हो। जहां पर्दे के पीछे कलाकार अपने किरदार से बिलकुल अलग होते हैं।

जब से सपा सरकार अस्तित्व में आई है, तब से जाने कितने ही मंचों पर मुलायम इस तरह कभी सरकार के मंत्रियों को तो कभी मुख्यमंत्री यानी अपने बेटे अखिलेश यादव को फटकार लगा चुके हैं, लेकिन किसी पर कभी उनकी फटकार का कोई असर नहीं हुआ। क्योंकि अगर असर हुआ होता तो आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की जो स्थिति है, वह नहीं होती। सरकार के मंत्री जिस तरह बेलगाम होकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं उसे देखकर तो बिल्कुल नहीं लगता कि नेता जी की डांट-फटकार का कोई असर होता है, फिर बार बार जनता के सामने यह ड्रामा करने की क्या जरूरत है?

एक तरफ गायत्री प्रजापति की तरह के मंत्री दोनों हाथों से काली कमाई कर रहे हैं लेकिन फिर भी साफ बच जा रहे हैं और दूसरी और आईपीएस अमिताभ ठाकुर और सूर्य प्रताप सिंह की कोई सुनने वाला भी नहीं है। सपा सरकार के राज की ये दो तस्वीरें साफ कर देती हैं कि सरकार किस तरह दो नावों की सवारी कर रही है और नेता जी डांट-फटकार की पतवार के सहारे दोनों नावों को खेने में लगे हैं। इससे पहले भी कैबिनेट की बैठक में मुलायम ने मंत्रियों को चेताया था कि वो अपने काम करने का ढंग बदल लें, लेकिन मंत्री उसके बाद और ज्यादा बेलगाम हो गए। राह चलते किसी से भी भिड़ जाना, कहीं भी बवाल करना, हंगामा करना, ये सारे गुण सपा के मंत्रियों में बहुत आम बात हैं। बहुत मुमकिन है कि इस बार इसीलिए नेता जी ने चुनाव वाला दांव चला कि शायद कुर्सी के डर से ही मंत्रियों के रवैये में कोई फर्क आ जाए। नेता जी के इस व्यवहार से यह तो साफ हो जाता है कि नेता जी 2017 के चुनावों को लेकर खासे चिंतित हैं, तभी तो अपने बेटे को भी समझा रहे हैं कि, ‘सुधर जाओ वरना अगला चुनाव हार जाओगे’।