यू.पी. की हलचल – छुट्टियों की राजनीति

khabar_lahariya_logo_12 (1)खबर लहरिया न्यूज नेटवर्क महिला पत्रकारों का एक समूह है। यह ऐसी महिला पत्रकार हैं जो ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में काम करती हैं।

आज छुट्टी है। आज सब बंद है। इस हफ्ते कोई अधिकारी नहीं मिलेंगे। त्यौहार के साथ शनिवार -इतवार मिलाकर पूरे सप्ताह बंद है। उत्तर प्रदेश में काम करते हुए जितने साल हुए हैं, ऐसा लगता है कि उससे भी ्ज्यादा समय यह सुनने को मिलता है। हमने पता करने की कोशिश की कि 2015 में सबसे ज्यादा  छुट्टियां कौनसे राज्य में हैं। नतीजा जानकार हमें हैरानी नहीं हुई – उत्तर प्रदेश में साल भर में चालीस सरकारी छुट्टियां हैं।
अखिलेश यादव ने मुख्य मंत्री बनने के बाद राज्य में सात नई छुट्टियां घोषित कीं। छुट्टियों की इस राजनीती में सभी को खुश रखा जाना जरूरी है। इस साल सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर छुट्टी दी गई। बुंदेलखंड के मशहूर डकैत ददुआ के भाई और उनके बेटे ने मुख्य मंत्री से निवेदन किया कि सरदार पटेल के देश के प्रति योगदान को पहचाना जाए। मुख्य मंत्री इस निवेदन को कैसे नजर अंदाज करते? आखिर पटेल कुर्मी समुदाय के बड़े नेता थे और कुर्मी अखिलेश के लिए एक बेहद जरूरी वोट बैंक। इसी तरह से आचार्य नरेंद्र देव जयंती पर भी इस साल छुट्टी घोषित कर दी। कभी दलित नेता की वर्षगाँठ पर छुट्टी, कभी मुसलमान त्यौहार पर छुट्टी, कभी पूर्व प्रधान मंत्री के जन्मदिन पर छुट्टी, किसी महाराजा की जयंती पर छुट्टी और कभी किसी समाजवादी के जन्मदिन की छुट्टी – छुट्टी की यह राजनीति उत्तर प्रदेश में सदियों से चली आ रही है। जिस समुदाय को खुश करना हो, उसके नाम पर एक छुट्टी दे दो। किसके नाम से छुट्टी होगी, यह भी सत्ताधारी पार्टी और उसकी राजनीति को दर्शाता है।
सरकारी छुट्टियों के साथ अन्य वैकल्पिक छुट्टियों को मिलाकर उत्तर प्रदेश में सरकारी लोग साल भर में छह महीने तक की छुट्टी ले सकते हैं। आजकल व्हाट्सप्प में सन्देश भेजे जा रहे हैं 2016 में होने वाली छुट्टियों के बारे में। सन्देश के साथ यह भी बताया जा रहा है कि कौनसी छुट्टी के साथ आप अन्य छुट्टी को जोड़कर लम्बी छुट्टी ले सकते हैं। सवाल यह उठता है कि सरकारी लोग काम पर कितने दिन जाते हैं? शायद इसका जवाब अब नए साल में ही मिलेगा।