यूपी में रविदास जयंती, धर्म है या राजनीति ?

raiwwwफरवरी 22 को वाराणसी में रविदास जयंती मनाई जाएगी। हर साल हज़ारों की संख्या में लोग इस त्यौहार में शामिल होने आते हैं। इस साल तो कुछ खास मेहमान आ रहे हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल रविदास जयंती के लिए वाराणसी आएंगे और रविदास मंदिर में पूजा करेंगे। हालांकि मोदी तो वाराणसी के अपने हैं, केजरीवाल का विजि़ट 2014 लोकसभा चुनाव के बाद पहला दौरा होगा।
आखिर क्यों रविदास जयंती के लिए मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री आ रहे हैं? यह भक्ति की भावना से है या राजनीति का खेल?
वाराणसी में सालों से रविदास जयंती मनाई जा रही है। लोहता के दलित बस्ती में रहने वाले 90 साल के केत्तल बताते हैं, ‘‘हम बचपन से रविदास बाबा का जन्मदिन मना रहे हैं। हम अपना छोटा-मोटा जुलूस निकालते थे। लेकिन अब यह शहरी त्योहार बन गया है, जिसे धूम-धाम से मनाया जाता है। यह मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद से शुरू हुआ है।‘‘ पाण्डेयपुर के रमेश कुमार भी कहते हैं कि रविदास जयंती का महत्त्व तबसे बढ़ा है जबसे दलित समुदाय राजनीति में एक वोट बैंक बना, खासकर मायावती के प्रशासन काल में।
क्या यही कारण है कि राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी फरवरी 22 को वाराणसी आ रहे हैं?
कौन हैं संत रविदास?
संत रविदास का जन्म 1398 में वाराणसी के एक दलित परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम संतोष दास और माता का नाम कर्मा देवी था। संतोष दास मोची थे। लेकिन रविदास का नाम भारत के ऐसे लोगों में शामिल है जो एकता और भाईचारे का उपदेश देते हैं। रविदास दुनिया के दिखावे से दूर होकर सादा जीवन और उच्च विचार की जि़न्दगी जीते थे और सन्देश देते थे।