यहां पर घर-घर आता है झूले वाला

घर के सामने लगा झूला, और झूला झूलते बच्चे
घर के सामने लगा झूला, और झूला झूलते बच्चे

जिला चित्रकूट। पहले लोगों को झूला झूलने के लिए सालों इंतजार करना पड़ता था और कुछ खास जगहों पर ही झूला लगता था जैसे कहीं प्रदर्शनी लगी हो या कोई प्रोग्राम हो तभी बच्चें और बड़े झूला झूल पाते थे। लेकिन अब तो चित्रकूट में आपके दरवाजे झूला वाला खुद आने लगा है और घर बैठे आप लोग झूला झूल सकते है।
झूले वाला राहुल बताता है कि इतनी बेरोजगारी है कि आदमी का खर्चा बैठे नहीं चलता है। इसलिए वह छत्तीसगढ़ से यहां पर झूला लेकर चार महीनों के लिए चले आते हैं। और घर-घर जाकर बच्चों और बड़ो को झूला झूलाने का काम करते है। बच्चों को पांच रूपये, बड़ो को दस रूपये में झूलाते है। शाम होते ही बच्चे मेरे झूले की राह ताकने लगते है।