यतनी लापरवाही कि आय दिन होत दुघर्टना

छत के ऊपर धरे बिजली के तार
छत के ऊपर धरे बिजली के तार

बिजली विभाग ओवर लोड अउर चोरी से बिजली जलावैं वालेन के जांच अउर बिल भरावैं का काम तो जोर शोर से करत है, पै जरजर मा सुधार करैं मा तारन के अनदेखी करत है। यहिका हरजाना आम जनता का भुगतै का परत है अउर आय दिन तार टूटैं से लोगन कि मउतैं होत है।
अगर हाल के बात कीन जाय तौ जून 2014 से अब तक मा ग्यारह हजार पावर के तार से दुई लोगन के मउत होई चुकी है। जानवर तौ आय दिन मरत ही हैं। यहिसे साफ पता चलत है कि विभाग केतनी बड़ी लापरवाही जानबूझ के करत है। अगर सरकार जनता से कमाई करैं अउर जनता का सुविधा दंे खातिर बिजली सप्लाई करिस है, तौ वहिका आपन जिम्मेदारी जरजर तारन का बदला के निभावैं का चाही।
ग्यारह हजार पावर के तारन मा प्लास्टिक के पाइप लगवावैं का चाही। मड़ई के घरन के ऊपर धरे तार अउर बस्ती के भीतर से ग्यारह हजार पावर के लाइन खीचैं है। इं सब समस्यन का ध्यान बिजली विभाग काहे नहीं देत आय? का सरकार का आम जनता के मउतन से कउनौ मतलब निहाय। या फेर सरकार सोचत है कि मउत होय वाले मड़इन के घरन का एक लाख रूपिया मुआवजा दें से उनका दुख दूर होई जात है। सच्चाई देखा जाय तौ साफ नजर आवत है कि सरकार का आपन आमदनी से मतलब है। आम जनता के मउतन से कउनौ मतलब निहाय।