मोबाइल संदेश असम में मातृ मृत्यु दर को कम कर सकता है

भारत के पूर्वी छोर पर एक ऐसी जगह जहां देश भर में माताओं की मृत्यु का अनुपात सबसे ज्यादा है, वहां कुछ पुरुष,  बच्चे और लगभग 40 महिलाएं एक बैठक में शामिल हुई। इस बैठक में बताया गया कि किस प्रकार एक ‘टेक्स्ट मेसेज’ या मोबाइल संदेश के ज़रिये महिलाओं को जीवन दान दे सकता है।

एक गैर लाभकारी परियोजना, ‘एंड मैटर्नल मोर्टैलिटी नाउ’ (एंडएमएमनाउ) के साथ जुड़ी सहायक गीता कहती हैं, “ हमें यह सुनिश्चित करना है कि आप और आपका बच्चा दोनों बीमारी से मुक्त हों, नियमित जांच-प्रक्रिया पूरी करना आपका कर्तव्य है। और अगर उपचार की मांग करते समय आपके साथ गलत तरीके से बर्ताव किया जाता है तो आपको इसकी सूचना देनी चाहिए।

इस परियोजना के तहत स्थानीय समुदायों से स्वयंसेवकों को प्रशिक्षत किया जाता। वे माताओं को उनके अधिकारों के संबंध में जागरुक करती हैं। वे मुफ्त सरकारी सेवाओं देने से इनकार करने वाले अधिकारियों की सूचना भी देती हैं। यह सब किसी एंड्रॉइड फोन पर पाठ संदेश या टेक्स्ट मेसेज के माध्यम से किया जाता है, जो परियोजना से जुड़े लोगों के बीच सह-स्वामित्व वाली है और वह फोन उनकी वेबसाइट के साथ जुड़ा होता है।

यहां बैठक में आईं माताएं आदिवासी हैं, जो उत्तर असम के सोनीतिपुर जिले के मुख्यालय  तेजपुर से लगभग 50 किमी पश्चिम, नारायणपुर चाय बागान में काम करती हैं। असम में 100,000 जीवित जन्मों पर 300 मौतों का मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) है। ये आंकड़े भारत में सबसे खराब और लगभग घाना 321 और सूडान 325 के बराबर हैं।

पिछले तीन सालों में, आदिवासी महिलाओं के टेक्स्ट-संदेश से सोनितपुर जिले के दो ब्लॉक के 16 चाय बागानों और गांवों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार हुआ है। कार्यक्रम को प्रसारित करने के लिए लगभग 40 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इसकी सफलता को देखते हुए दिल्ली में दलित महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए भी इस तरह के प्रयास किए गए हैं।

वर्ष 2014 से बाद से एंडएमएमनाऊ प्रोजेक्टके तहत पैरालीगल कर्मचारियों द्वारा 230 से अधिक उल्लंघन दर्ज किए गए हैं। इनमें से 91 मुफ्त चिकित्सा सेवाओं जैसे कि रक्त परीक्षण, संक्रमण, एम्बुलेंस और दवाइयां की मांग से संबंधित हैं। 82 आंगनवाडी केंद्रों द्वारा सामानों की पूर्ति न करने के मामले भी हैं जैसे कि सरकारी योजना के तहत सुरक्षित मातृत्व को सुनिश्चित करने के लिए घर ले जाने के लिए राशन और भोजन के लाभ की गारंटी।

पैरालीगल कर्मचारियों द्वारा भेजे गए पाठ या टेक्स्ट संदेश के सत्यापन और तथ्यों की खोज परक जांच के बाद एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार होती है और उस रिपोर्ट को परियोजना की इंटरैक्टिव वेबसाइट पर डाला जाता है। हर तीन महीने में आयोजित सामुदायिक शिकायत मंचों के दौरान वे संदेश ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। प्रोग्राम मैनेजर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को लागू करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसी मंच में संभावित समाधानों पर चर्चा की जाती है। एंडएमएमनाऊ प्रोजेक्टके कर्मचारी भी सोनितपुर जिले के डिप्टी कमिश्नर के साथ मिलकर इस तरह के उल्लंघनों पर चर्चा करते हैं और समाधानों की सिफारिशें करते हैं।

एंडएमएमनाउ प्रोजेक्ट तीन गैर-सरकारी संगठनों के एक समूह द्वारा चलाया जाता है। ये एनजीओ हैं नजदीक, इंटरनेशनल सेंटर फॉर एडवोकेट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (आईसीएएडी), और प्रमोशन एंड एडवांसमेंट ऑफ जस्टिस, हार्मनी एंड राइट्स ऑफ आदिवासी (पीएजेएचआरए )। ये संस्थाएं वर्ष 2014 में एक साथ आए थे।

एंडएमएमनाउ प्रोजेक्टके पास वर्तमान में लगभग 17 पैरालीगल हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर के लिए स्वयंसेवक के लिए समय निकालना एक चुनौती है। भीमा पीएजेएचआरए साथ एक बाल अधिकार परियोजना पर काम कर रही हैं । सबीना एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है। गीती कहती हैं, “कुछ महिलाओ की शादी हो गई है और वे दूर चली गयीं हैं। कुछ अन्य को काम और घरेलू जिम्मेदारियों से फुर्सत नहीं मिलती है। प्रगति धीमी रही है, लेकिन यह बंद नहीं हुई है।

नजदीक आईसीएएडी समेत पांच अन्य गैर-सरकारी संगठनों के साथ पार्टनरशिप पर है, जिसमें 70 दलित महिलाओं को न सिर्फ प्रजनन-स्वास्थ्य से संबंधित उल्लंघनों की रिपोर्ट करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। पोषण, आवास सेवाएं और पानी और स्वच्छता के संबंध में भी उनको प्रशिक्षित किया जा रहा है।

अन्य दो मलिन बस्तियों में भी लगभग 50 और पैरागलगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

फोटो और लेख साभार: इंडियास्पेंड