मेहनत और लगन से मंजिल होती है हासिल, मिलिए बांदा की प्रतीक्षा से जो इलाहबाद में समीक्षा अधिकारी हैं

छोटे शहरों से पढ़ कर अच्छी नौकरी पाने वाली लड़कियों में आज बाँदा की प्रतीक्षा पांडे का नाम भी शामिल हो गया है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई कर समीक्षा अधिकारी बन जिले का नाम रोशन किया है। आज वह अपनी उम्र की दूसरी लड़कियों के लिए हीरो बन गयी हैं।

प्रतीक्षा बताती है, हम 2000 में बाँदा आ पाए और तब से यहीं हैं। मैंने अपनी पढ़ाई बाँदा से ही की है। मुझे बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा है। कोर्स की किताबों के अलावा भी मुझे नॉवेल आदि पढ़ने का बेहद शौक रहा है। अभी मैं यहाँ कृषि अधिकारी के रूप में कार्यरत हूँ और जल्द ही समीक्षा अधिकारी का पद सम्भालने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाऊँगी।

वह आगे बताती हैं, जहाँ तक महिलाओं का नौकरी और पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ने और आने वाली मुसीबतों का सवाल है तो वह तो तभी से शुरू हो जाती हैं जब महिलाएं घर से कदम बाहर रखती हैं। इसलिए घबराने से नहीं, उस स्थिति का सामना करने से ही हमें अपनी मंजिल मिल सकती हैं।

प्रतीक्षा का मानना  है कि उनके साथ किसी एक का सहयोग नही था बल्कि हर कदम पर सभी का सहयोग मिला। घर-परिवार, दोस्त और ऑफिस के पूरे स्टाफ ने उनका मनोबल बढ़ाया।

महत्वकांक्षी प्रतीक्षा का सपना आईएएस बनने का है और अब वह उसके लिए तैयारी करने का मन बना चुकी हैं।

रिपोर्टर- गीता 

 

Published on Jun 1, 2017