मुज़फ्फरनगर पर नज़र – चुनावी माहौल छाया

जिला मुज़फ्फरनगर। दंगों से प्रभावित पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में 10 अप्रैल को प्रतिशत मतदान हुआ।
पिछले आठ महीने से कैंपों मे रह रहे लोग हर पार्टी और नेता से नाराज हैं। शाहपुर और बसीकला के कैंपों के तो ज्यादातर लोगों ने नोटा पर वोट डालने का मन बना लिया है। शाहपुर कैंप में रह रही रुख्साना को अब तक मुआवज़ा नहीं मिला। न हीं मजदूरी का कोई ज़रिया। वहीं गुस्से से भरी रेहाना कहती हैं कि जैसे ईंट पकती है, आग में हमें भी झोंक दिया गया है। उन्होंने कहा नोटा पर बटन दबाएंगे।
वहीं सिसोली गांव के याकूब अली और काकड़ा गांव के सलीम ने इनकी बात काटते हुए कहा कि किसी ने दंगा प्रभावित लोगों का ध्यान नहीं किया पर सपा सरकार ने कुछ लोगों को मुआवज़ा दिया है। अखिलेश ने वादा किया है कि चुनाव के बाद वो बचे हुए लोगों को भी मुआवज़ा देंगे। इसलिए याकूब का वोट सपा को जाएगा।

भाजपा के अमित शाह को नोटिस

amit-shah1उधर 3 अप्रैल 2014 को मुज़फ्फरनगर में भाषण देते हुए भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रबंधक अमित शाह ने लोगों को दंगों का बदला लेने के लिए उकसाने की कोशिश की। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने शाह को कानूनी नोटिस भेजा है।
शाह ने कहा कि यह लोकसभा चुनाव मुज़फ्फरनगर और शामली के लोगों के लिए बदला लेने का मौका है। जिन लोगों ने अन्याय किया है और हमारी बेइज्ज़ती की, उनको सबक सिखाने का मौका है।
निर्वाचन आयोग ने शाह से नफरत फैलाने वाले इस भाषण की सफाई मांगी है क्योंकि खासकर चुनाव के समय ऐसे लोगों को भड़काना आचार संहिता के खिलाफ है।
दूसरी ओर भाजपा प्रधानमंत्री उम्मीदवार और शाह के करीबी नरेंद्र मोदी ने मामले पर चुप्पी साधी हुई है।