मिलिए ललितपुर की द्रोपती से, जिनकी आजीविका संगीत से है

जिला ललितपुर, गांव कुणेश्वर कत हे के मन में लगन और जजबा हो तो मंजिल मिल ही जात। एसी ही एक महिला ललितपुर जिला के कुणेश्वर गांव की द्रोपती को भी मिल गयी। द्रोपती को बचपन से गाना गाबे को शौक हतो लेकिन परिवार के रोक टोक ने द्रोपती को आगे नइ बढ़न दओ।जिला ललितपुर, गांव कुणेश्वर कत हे के मन में लगन और जजबा हो तो मंजिल मिल ही जात। एसी ही एक महिला ललितपुर जिला के कुणेश्वर गांव की द्रोपती को भी मिल गयी। द्रोपती को बचपन से गाना गाबे को शौक हतो लेकिन परिवार के रोक टोक ने द्रोपती को आगे नइ बढ़न दओ। लेकिन द्रोपती ने आगे चल के जो काम करो। अब द्रोपती शादी, पार्टी, बधाई में झूम के गाती। द्रोपती ने बताई के हमे संगीत करत करत सात आठ साल हो गयी। हमाओ मन संगीत में बोहतई लगत अगर हम दिन और रात भर भी गात रहे तो भी हमे नींद नइ आहे। हमने गायकी तो बहुत छोटे से करी लेकिन पार्टी अबे बनाई। पहले कोनऊ उम्मीद नइ हती हम पहले सोच रए ते के एसो काम नइ  कर हे।लेकिन हमाय ऊपर परेशानी आई तो फिर हमने गाबो शुरू करो। पहले हम थोड़े थोड़े रूपइया में जात रए। जब संगीत सीख गये तो हम भी जान लगे। हमाय घर वाले बोले के तुम जो काम नइ करो तुम्हे नइ जाने गाबे हम खिला हे। फिर जब हम घर में रए तो कोऊ ने नइ पूछी के हम दे रए गेंहू के आटा तो हम पाल  लेते अपने मोड़ी मोड़न को। हमाय तीन बच्चा हे जब ज्यादा परशानी बढ़ गयी तो हमने गाबो शुरू करो अब हम भजन, कीर्तन, बधाई, विदाई गीत सब में जात। एक पार्टी में आठ आदमी जात। दो ओरते ढोलक, झीका, मजीरा, हरमुनिया वाले सब जात। रूपइया तो जामे कितऊ अच्छे मिल जात तो कितऊ कम मिलत।

रिपोर्टर-  सुषमा

28/06/2017 को प्रकाशित