मिलिए: लक्ष्मी अग्रवाल से

साभार: विकिपीडिया

• 15 साल की उम्र में जब लक्ष्मी अपने स्कूल से लौट रही थीं तब उनसे दुगने उम्र के आदमी ने उनके चेहरे पर तेज़ाब फेंक दिया था। उनका पूरा चेहरा जल गया और इस हादसे में उनको कई घन्टों का दर्दनाक ऑपरेशन सहना पड़ा।
• पर लक्ष्मी ने हार नहीं मान कर अपनी ज़िन्दगी को नया मोड़ देने की ठान ली। अपने जैसे तेज़ाब हमले से गुजरने वाली लड़कियों के लिए उन्होंने लड़ाई जारी की। ‘स्टॉप एसिड अटैक’ अभियान का हिस्सा बनकर उन्होंने अपनी जैसी कई सारी लड़कियों को हौसला देना शुरू किया।
• अपने अभियान के तहत उन्होंने शीरोज नाम के कैफे की शुरूआत की। शीरोज फिलहाल तीन राज्यों में चल रहा है और इनमें काम करने वाली महिलाएं तेज़ाब हमले की उत्तरजीवियां हैं।
• लक्ष्मी आज दुनिया भर में मशहूर हैं, और उन्हें बहुत सारे अंतरराष्ट्रिय कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है, जहां वे तेज़ाब हमले पर रोक लगाने की अपने काम के बारे में चर्चा करती हैं। अम्रीका के पूर्वी ‘फ़र्स्ट लेडी’ मिशेल ओबामा से भी लक्ष्मी मिली हैं।
• लक्ष्मी अपने मित्र आलोक दीक्षित के साथ रहती हैं, और आलोक के साथ उनकी एक बेटी भी हैं, जिसका नाम पीहू है।