मिलिए बाँदा के शिव मंगल सिंह यादव से, नेत्रहीन है पर करतें हैं बढ़िया काम

जिला बांदा, ब्लाक बबेरू मुरवल दुनिया मा तरह-तरह के मड़ई होत हैं। कउनौ के हाथ टूट है तौ कउनौ के गोड। कउनौ कउनौ मड़ई का तौ आंखी से नहीं देखात आय। यहितान का लोकल हीरो है 60 साल का शिवमंगल सिंह यादव। आंखी न होय के बादौ शिवमंगल फर्नीचर अउर रेशम के धागा से नीक नीक चीज बना लेत हैं।
शिवमंगल सिंह यादव आपन कहानी बतावत है कि जबै मैं 6 साल साल का रहै हौ तौ चेचक निकली रहै तबै से मोहिका नही देखात आय।आंखी न होय के बादौ मै बहुतै महीन से महीन काम कर सकत हौ फनीर्चर का काम करत हौ मिस्त्री गिरी भी करत हौ सबै ,चारपाई अउर मचिया भी बिन लेत हौ।
रेशम विभाग से बुनाई का काम सीखे हौ जेहिसे मै रेशम का सूट ,तौलिया ,कुर्ता,चादर,कम्बल समेत कइयौ चीज बनावै सीखे हौ कउनौ भी चीज होय वहिका छू के देख लेत हौ तौ वहिके नकल उतार सकत हौ।मोहिका गावे बजावै का भी बहुतै सउख हैं।

रिपोर्टर- मीरा देवी और शिव देवी

15/12/2016 को प्रकाशित