मिलिए चित्रकूट के बरगढ़ के मूर्तिकार अवध बिहारी मौर्य से

जिला चित्रकूट, ब्लाक मऊ, क़स्बा बरगढ़ दशहरा अउर दीपावली के त्यौहार जइसे जइसे समय आवै लागत हवै तौ मड़ई आपन आपन कला दिखाबै मा लाग जात्त हवै। अब दशहरा अउर नवरात्र आवै वाला हवै तौ मूर्ति बनावै वाले मड़ई दुइ महीना पहिले से मूर्ति बनावै लागत हवैं। यहिनतान का एक मूर्तिकार हवै।
अवध बिहारी से खबर लहरिया बात करिस तौ वा बताइस कि मौसम के हिसाब से दीपावली अउर दशहरा मा खिलौना बनावै का काम करत हवै। या समय डायनासुर के साठ फिट का खिलौना भी बनाये हौं। खिलौना मा कलर करै खातिर मशीन हवै। वहै से कलर भरत हवै कलर कानपुर से लावत हौं खिलौना अउर मूर्ति बनवावै खातिर राजापुर, मऊ अउर लालतारोड से आर्डर आवत हवैं। मूर्ति बनावै का वहिका सउख रहै। बेरोजगारी होय के कारन आपन खुद का काम करब नीक हवै।
कलकत्ता से चित्रकूट तक हिंया ग्यारह लोगन के टोली बनी हवै मूर्ति के। इ हर साल दुर्गा देवी के मूर्ति बनावै खातिर कलकत्ता शहर से एक गांव से दुसरे गांव मा जात हवैं। मूर्तिकार कन्हैया लाल का कहब हवै कि अगल बगल के गांव के मड़ई बनावत रहैं तौ देख देख सीख गयेंव।
राजू बताइस वा पांच साल से मूर्ति बनावै का काम करत हवैं। एक मूर्ति पांच दिन मा तैयार होइ जात हवै। बनावै मा दुइ तीन लोग लागत हवैं। मूर्ति बनावै खातिर सुतरी, कील,माटी अउर बांस लागत हवै। हम ग्यारह लोग हन लगभग 90 मूर्ति बनाइत हन एक महीना मा। एक मूर्ति एक हजार रुपिया से लइके पांच हजार रुपिया के बिकत हवै। कुछ मूर्तिन मा घाटा लाग जात हवै।

रिपोर्टर- सहोद्रा देवी और सुनीता देवी 

 

02/09/2016 को प्रकाशित

मिलिए चित्रकूट के बरगढ़ के मूर्तिकार अवध बिहारी मौर्य से