मास्टरों की कमी – कैसे हो पढ़ाई?

जिला चित्रकूट। जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या चैदह सौ पैंतिस है। मास्टरों की कमी है जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
ब्लाक कर्वी का गांव बैहार प्राथमिक स्कूल। स्कूल के हेडमास्टर मानसिंह ने बताया कि हमारे स्कूल में एक सौ बयालिस बच्चे हंै। मेरे साथ एक शिक्षा मित्र जानकी शरण हंै। इतने बच्चों को मैं अकेले कैसे पढाऊं ? स्कूल में दो सहायक मास्टरों की ज़रूरत है।
ब्लाक मानिकपुर प्राथमिक स्कूल सरहट। स्कूल में एक सौ पैंतिस बच्चे पढ़ने आते हैं। एक हेड मास्टर विनय कुमार और शिक्षा मित्र संतोष हैं। विनय कुमार ने बताया कि मास्टरों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई ठीक से नहीं होती है। कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पढ़ता है। दो मास्टरों की ज़रूरत है।
ब्लााक रामनगर, गांव चोरहा,बिनागर बस्ती। यहां प्राथमिक स्कूल के सहायक मास्टर सुनील कुमार कहते हैं कि स्कूल में एक सौ तैंतिस बच्चे हैं। शिक्षामित्र के भरोसे पांच साल से स्कूल चल रहा है।
ब्लाक मऊ प्राथमिक स्कूल गांव हटवा। यहां स्कूल हेड मास्टर के भरोसे चलता है। एक हेड मास्टर और तीन सौ बच्चे। मास्टर मुकुन्द लाल ने बताया कि बच्चों को अकेले संभालना मुश्किल है। बच्चों को पढ़ांऊ या मिड डे मील की व्यवस्था करूं या सरकार की बाकी ड्यूटी।
जि़ला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि अगस्त 2014 में चार सौ पचास शिक्षा मित्रों को मास्टरों का दर्जा दिया है। इन मास्टरों को पिछड़े ब्लाक जैसे मानिकपुर,मऊ और रामनगर में भेजा गया है। बहत्तर हजार मास्टरों की भर्ती होनी है। भर्ती करना सरकार का काम है।